आलस को दूर करने के 50 तरीके : दोस्तों आपने अपने जीवन में एक उक्ति तो जरूर सुनी होगी कि “आलस्यमेव मनुश्याणाम परम् शत्रु” । इस संसार में व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्ति में कई बाधाएं आती है उन्हीं बाधाओं में एक प्रमुख बाधा है ‘आलस्य’ । जब तक तन्द्रा है तब तक चिंता है ।

मेरा तो मानना है कि आलस्य ही चिंता का मूल है।आलसी व्यक्ति कभी भी इस संसार में सुखी जीवन -यापन नही कर सकता । उसे हमेशा कुछ न कुछ चिंताएं जरूर रहती है । आलसी व्यक्ति हमेशा से ही अपने लक्ष्यो से दूर भागता रहता है।

उसके मन और देह दोनों उसका साथ छोड़ देते है  ।जैसे एक विद्यार्थी के आलस्य करने पर उसके समक्ष अपने अकादमिक कार्यों को पूरा न कर पाने की चिंता रहती है । वह अपनी पढ़ाई में मन नहीं लगा पाता।

आलस को दूर करने के 50 तरीकेआलस को दूर करने के 50 तरीके । How To Overcome Laziness

एक बिज़नेसमेन अगर आलस्य करता है तो वह अपने काम में मन नहीं लगा पायेगा और फलतः दिनों दिन उसका मारर्केट गिरता जायेगा। सक्षिप्त में कहा जाए तो जो भी मनुष्य आलस्य से ग्रसित है वो कदापि सुखी नहीं होगा और संसार में उसे अपयश की प्राप्ति होगी।

सच बात तो यह है कि आलस्य अगर किसी व्यक्ति को जकड़ लेता है तो फिर उसको कभी छोड़ता नहीं । फलतः उसका परिणाम क्या होगा ,यह बात सर्व विदित है।

दोस्तों आप सभी ने अपने बचपन में खरगोश और कछुए वाली कहानी तो जरूर सुनी होगी । उस कहानी में खरगोश के हारने की मात्र एक वजह होती है और वह  है आलस्य। दैनिक जीवन में ऐसे आलसी व्यक्तियों के कई उदाहरण देखने को मिल जाते हैं।

आज के युग में ऐसा कोनसा व्यक्ति नहीं है जो अपनी प्रगति नहीं चाहता ,अपने जीवन स्तर को सुधारना नहीं चाहता । निश्चित रूप से ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जो उपरिलिखित बातों को नहीं करना चाहता।

How To Overcome Laziness in hindi

यही मनुष्य की  आदि कल से नियति रही है। परंतु उसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा रहा है आलस्य।

आलस्य एक ऐसा श्वान है जिस पर अगर कोई व्यक्ति सवार हो जाए तो सही अर्थों में वह अपने लिए ही कब्र खोद रहा होता है। यदि हम पर आलस्य हावी हो जाए तो हमें बाहरी दुनिया का कोई भी ख्याल नही रहता और हम अपने उसी तन्द्रालस भाव में रहते हैं।  आलस्य में खोया व्यक्ति अपना स्वयं का हित- अहित भी नहीं सोच पाता और अपने सुख -समृद्धि के सारे रास्तों को छोड़कर एक गलत राह पर चल पड़ता है। ऐसा व्यक्ति संसार में घृणा का पात्र बनता है ।

आलस्य से ग्रसित व्यक्तियों की परमपिता परमेश्वर भी मदद नहीं कर पाते । ‘आज नहीं कल’हमेशा से ही आलसी व्यक्तियों का बहाना रहा है। कई बार किसी कार्य को करने की शक्ति हमारे अंदर होते हुए भी हम उस कार्य का कल -कल करते टालते रहते हैं और समय निकल जाता है । उसले बाद हमारे पास हाथ मलने के अलावा और कोई चारा नहीं रह पाता  है। आलसी व्यक्ति पश्चाताप करने के सिवाय कुछ भी नहीं कर पाता है।

आलस कैसे दूर करे इसकी पूरी जानकारी

स्वामी विवेकानद ने कहा है कि “उठो जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।”कई बार हमारे अंदर किसी काम को करने की शक्ति ज्यादा होते हुए भी हम उस काम को पूरे मन से नहीं करते । इसका यही अर्थ है कि हम अपने काम के प्रति वफादार नही है । हम अपने काम में कोताही बरत रहे है । हमें अपने कर्तव्य का बोध नही  है ।  उसका अंजाम यही होता है कि जितनी फल प्राप्ति हमें होनी चाहिए वो नहीं हो पाती।क्षमता  से कम कार्य करना भी हमारी शक्ति को नष्ट करता है ।

हिंदी के बहुत ही प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर अपनी एक रचना में लिखते है-

मेल बैठता नहीं सदा दर्शन-जीवन का।
कहते हैं, आलस्य बड़ा भारी दुर्गुण है।
किन्तु, आलसी हुए कब किसको सुख मिला  है?
और मोददायिनीं वस्तुएँ सभी व्यर्थ हैं।
फूल और तारे, इनका उपयोग कौन हैं?

#आलस्य के दुष्परिणाम-

आलस्य नाम का यह अवगुण भले ही एक प्रतीत होता हो लेकिन अपने आप में कई दुर्गुण समेटे हुए है जैसे- आलसी व्यक्ति काम करने से बचने के लिए झूठ बोलेगा , चोरी करेगा और शायद हेरा-फेरी भी करेगा ।
इस दृष्टि से देखा जाए तो , आलस न सिर्फ आलसी मनुष्य का शत्रु है बल्कि उससे जुड़े हुए अन्य लोगों और समाज का भी शत्रु है ।

आलस दूर करने के best टिप्स hindi में

आलसी व्यक्ति आदि काल से ही अपयश को प्राप्त हुआ है।

आजकल का मनुष्य  मशीन पर हद से ज्यादा ही निर्भर है। आज मशीन हम पर हावी हो चुकी है । हमें हर काम को करने के लिए मशीन की मदद लेनी पड़ी रही है। आज हम लोगो को थोड़ी दूर जाने के लिए भी स्कूटर या कार का प्रयोग करना पड़ता है। इसका एक ही कारण है हमारी अंदर की इच्छा शक्ति खत्म हो चुकी है।

हम अपने आप को किसी काम करने के लायक ही नही समझते और फलतः मशीनों पर हमारी निर्भरता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। हमें चाहिए कि हम लोग मशीन पर अपनी निर्भर्ट्स को कम करके ज्यादा से ज्यादा अपने शरीर को काम में लावें ताकि इस जंग लगे शरीर का भी कोई सार्थस्क उपयोग हो सके।

सुस्ती व आलस्य एक ऐसी चीज़ है जो इंसान को किसी भी क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ने देती है। जो व्यक्ति आलसी होता है वह लगभग हर कार्य करने में यथासंभव टाल- मटोल की कोशिश करता है और उसका परिणाम यह होता है कि जीवन के किसी भी मैदान में सफल नहीं हो पाता है।

अपने शारीर से आलसीपन कैसे दूर करे

आलस्य एक एसी विशेषता है जिसकी निंदा की गयी है और वह किसी खास गुट से विशेष नहीं है परंतु जब यही आलस्य जवान या नौजवान में होता है तो यह अधिक हानिकारक होता है क्योंकि जवान व नौजवान विकास व उन्नति के काल में होता है और जब वह आलस्य करने लगता है तो मानव प्रगति की सीढियों पर कदम ही नहीं रख पाता है और आगे बढने का समय उसके हाथ से निकल जाता है।

आलस्य सदैव मनुष्य को आगे बढ़ने से रोकता है और व्यक्ति को पीछे धकेलता रहता है। आलस्य एसी बुरी चीज़ है जो इंसान के व्यक्तित्व को कुचल देती है और जीवन का स्वर्णिम समय अर्थहीन कार्यों में चला जाता है। आलस्य एक ऐसा दुष्चक्र है जिसके अंदर अगर कोई फंस जाए तो उसका वापिस बाहर निकलना बहुत मुश्किल है। परिणाम स्वरूप वह अपने जीवन में पीछे रह जाता है।

#आलस्य पर विजय कैसे पाएं?

आलस्य को दूर करने के लिए सर्वप्रथम अपने जेहन में एक विचार लाइए कि मेरे इस सृष्टि में जन्म लेने के पीछे क्या कारन रहा होगा?कुछ कारण रहा भी होगा या विधाता ने मुझे यूं ही अकारण मुझे नीचे फेंक दिया ?मुझे इस सृष्टि में एक मनुष्य के रूप में ही क्यों जगह मिली ?क्यों न मुझे किसी अन्य प्राणी की योनि मिली?

यदि हम लोग इन सब बातों पर विचार करते हैं तो पाते है कि हम किसी विशेष उद्देश्य से ही इस संसार में उतरे  हैं। जब हम इन बातों पर मनन करते हैं तो  निश्चित रूप से हमारे अंदर सुस्ती नहीं आएगी और हम  अपने कर्तव्यों के निर्वाह का पूर्ण प्रयास करेंगे।आलस्य को परास्त करने के लिए मज़बूत हौसले होने भी जरूरी है।

जब हम अपनी शक्तियों से भी बढ़कर सोचेंगे तभी तो अपना शत प्रतिशत दे पाएंगे । जब हमने अपनी पूरन सीमा के अनुरूप सोचा ही नहीं तो कैसे हम अपना पूरा दे पाएंगे?इसलिए किसी भी व्यक्ति को आलस्य पर विजय पाने के लिए उसके इरादों में मजबूती होना आवश्यक है।

आलस दूर करने के अचूक उपाय

एक चीज़ लक्ष्य का निर्धारण जो कि इरादों में मजबूती का कारण बनता है। जिसकी चर्चा हमने अपने पिछले भाग में की थी। उच्च लक्ष्यों का निर्धारण भी इस विषय में सहायक है। अलबत्ता हमें कुछ लक्ष्यों का अर्थ अतिवाद नहीं लेना चाहिए।हमें किसी भी व्यक्ति में अगर आलस्य को जड़ से नष्ट करना है तो उस व्यक्ति को सबसे पहले आलस्य के दुष्परिणामों के बारे में बताना आवश्यक होगा।

सबसे पहले हमें उस की विसंगति को दूर करने ले लिए उसके मन मस्तिष्क में इस चीज़ के प्रति ग्गर्ण उत्पन्न करना जरूरी होगा।जो व्यक्ति यह जानता है कि यह जीवन उसको उपहार स्वरुप ईश्वर द्वारा दिया जिस है और इस जीवन में किये गए सभी कार्यों का लेखा -जोखा ईश्वर अपने पास रखता है । इन सभी बातों को ध्यान में रखने वाला व्यक्ति कभी भी जीवन में अपने कार्यों के प्रति कोताही नहीं बरतेगा । और निरन्तर अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहेगा ।

आलस्य को दूर करने के लिए आप आपने मन मस्तिष्क में विचार कीजिये कि आप को जिस दिशा में जाना है क्या आप उसी दिशा में अग्रसर हो या नहीं। यदि आपको लगता है कि आप सही दिशा में सही त्रिले से जा रहे हो तो ठीक है। अन्यथा अपने नित्य कार्यक्रम में बदलाव लाइए एवं सकारात्मक सोच के साथ एक नया कदम उठाये अपने लक्ष्य के प्रति।

How To Avoid Laziness (कैसे दूर करें अपना आलस्य)

आलस्य को दूर करने ले लिए अपने जीवन में टालने की प्रवर्ति को बिल्कुल निकल दें।प्रत्येक काम को करते समय उसके अंजाम के बारे में सोचें तो निश्चित रूप से आप गलत रास्ते अर्थात आलस्य पर सवार नहीं होंगे । फलतः आप नित प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेंगे।

अत: मनुष्य को आलस्य और प्रमाद का त्याग करके सदैव पुरुषार्थी बना रहना चाहिए| जो व्यक्ति जितेन्द्रिय और दक्ष है उसकी सदा विजय होती है और वह अपने प्रयत्न में सदा सफल होता है|

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