दोस्तों, आज हम गुप्त साम्राज्य के बारे में बात करेंगे। असल में गुप्त साम्राज्य प्राचीन भारत Ancient History के इतिहास का एक अहम हिस्सा Important Part है। प्राचीन भारत के इतिहास में सबसे पहले हम लोग बात करते हैं पुरापाषाण युग Palaeolithic Age , मध्य पाषाण युग Mesolithic Age और नवपाषाण युग Neolithic Age के बारे में। जैसे ही ये Topic हमारा खत्म होता है उसके बाद हम लोग Study करते हैं.

गुप्त साम्राज्य का इतिहास की पूरी जानकारी

Harappan Civilization के बारे में उसके बाद आर्यन्स Aryans , जैनिज़्म Jainism , बुद्धिज़्म Buddhism , इन सबके बारे में हम पढ़ते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में मौर्य साम्राज्य का इतिहास बहुत अधिक महत्वपूर्ण है और उसके बाद जो आता है वो है गुप्त साम्राज्य । अगर प्राचीन भारत के इतिहास पर हम एक नज़र डालेंगे तो कोई भी कालखंड हम में उतना Excitement नहीं पैदा करेगा जितनी की गुप्त साम्राज्य का इतिहास करेगा।

गुप्त साम्राज्य का इतिहास - History of the Gupta Empire in Hindi

इसका समय तीसरी सदी के अंत से आरम्भ हो जाता है और सातवीं सदी के अंत तक रहता है। ये वही काल है जिसे हमारे इतिहासकारों ने प्राचीन भारत का क्लासिकी युग Classic Age या फिर स्वर्ण काल के नाम से सम्बोधित किया है Classic Age या फिर स्वर्ण काल से आशय यह है कि उस समय में कला अथवा साहित्य को श्रेष्ठतम का दर्जा प्राप्त हो। ऐसी चीज़ों को अत्यधिक महत्वपूर्ण समझा जाए और प्रोत्साहन दिया जाए।

● गुप्त साम्राज्य की स्थापना/ Rise Of Guptas Empire

जब मौर्य साम्राज्य का पतन होता है तो दो बड़ी शक्ति शासन में आ जाती हैं और वो दो शक्तियां हैं Satavahans और Kushans, इनके कार्यकाल में पांच अवस्थाओं तक मानो भारत खंडित अवस्था में रह गया। उसके बाद उदय हुआ गुप्त साम्राज्य के शासकों का। गुप्त साम्राज्य के शासकों ने India को एक नई उड़ान दी।

खंडित भारत में फिर से जान डाल दी। गुप्त साम्राज्य के शासकों ने ही भारत को एक अखंड और सबल राष्ट्र के रूप परिवर्तित किया। Guptas ने ही India को राजनीतिक एकता प्रदान की थी। अगर बात करें गुप्त साम्राज्य की उतपत्ति की तो इनका उदय तीसरी सदी के अंत में हुआ था। मौर्य साम्राज्य के बाद गुप्त साम्राज्य ने ही भारत को मजबूती दी थी।

History of the Gupta Empire in Hindi

मौर्य काल के बाद तीसरी शताब्दी में तीन राजवंशों की उतपत्ति हुई, दक्षिण भारत में बाकाटक की, मध्य भारत में नाग शक्ति की और उत्तर पूर्व में गुप्त राजवंश की। गुप्त साम्राज्य का उदय Prayag के पास कौशाम्बी Kaushambi में हुआ था। गुप्त कुषाणों Kushans के सामंत थे। गुप्त वंश का जो आरम्भिक राज्य था वो उत्तर प्रदेश और बिहार था।

गुप्त वंश की स्थापना जिन्होंने की थी उनका नाम है महाराजा श्रीगुप्त । इन्होंने ही गुप्त साम्राज्य की नींव रखी थी। उन्होंने इस वंश की स्थापना 240ई. में की थी। इस वंश के शासकों ने लगभग 300 Years तक शासन किया था। इस वंश के तीन प्रमुख शासक हुए और उनके नाम हैं- चन्द्रगुप्त प्रथम Chandragupta l , समुद्रगुप्त Samudragupta और चन्द्रगुप्त द्वितीय Chandragupta विक्रमादित्य ।

● गुप्त साम्राज्य के शासक/ Gupta Empires

◆ श्रीगुप्त

गुप्त वंश का जो प्रथम शासक था वो था श्रीगुप्त 240 – 280ई. । श्री गुप्त ने ही गुप्त साम्राज्य की नींव रखी थी। इसीलिए श्रीगुप्त को ही गुप्त साम्राज्य को स्थापित करने का Credit दिया जाता है। जो ताम्रपत्र पूना से मिले हैं उनमें श्रीगुप्त को आदिराज नाम से पुकारा गया है।

श्रीगुप्त ने चीनी यात्रियों के लिए गया में एक मंदिर का Foundation करवाया था और इस बारे में जानकारी एक चीनी यात्री द्वारा मिली थी जिसका नाम इत्सिंग था। श्रीगुप्त के समय में महाराजा की उपाधि सामन्तों को प्रदान की जाती थी। अतः श्रीगुप्त किसी के अधीन शासक था।

◆ घटोत्कच

श्रीगुप्त के बाद उसका पुत्र घटोत्कच 280 – 319ई. शासक बना। घटोत्कच गुप्त ने महाराजा की उपाधि धारण की थी। घटोत्कच गुप्त के बाद उसका पुत्र चन्द्रगुप्त Chandragupta l उसका उत्तराधिकारी हुआ। गुप्त का वास्तविक संस्थापक चन्द्रगुप्त प्रथम को ही माना जाता है।

Secret empire History in Hindi

◆ चन्द्रगुप्त प्रथम

Chandragupta l ही गुप्त वंश का प्रथम Independent शासक था। चन्द्रगुप्त प्रथम ने 319ई. से लेकर 335ई. तक शासन किया था। चन्द्रगुप्त प्रथम ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की हुई थी। जब से चन्द्रगुप्त प्रथम ने राजगद्दी संभाली तब से ही गुप्त संवत की Starting हुई। चन्द्रगुप्त प्रथम का विवाह लिच्छवी वंश की एक सम्मानित राजकुमारी के साथ हुआ।

जिस राजकुमारी के साथ चन्द्रगुप्त का विवाह हुआ उसका नाम कुमार देवी था। विवाह के बाद से लिच्छवी राज्य भी चन्द्रगुप्त के Under में आ गया और मगध उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में सम्मिलित हो गया।
चन्द्रगुप्त ने अपने शासनकाल में जो Coins चलवाए थे उसमें उसने अपनी और अपनी पत्नी कुमार देवी के चित्र को छपवाया।

चन्द्रगुप्त ने लिच्छवी के साथ सम्बन्ध बनाकर अपने राज्य को राजनीतिक तौर पर सुदृढ़ और समृद्ध बनाया। चन्द्रगुप्त ने कौशाम्बी तथा कौशल के महाराजाओं को हराकर उन्हें अपने राज्य में मिला लिया था और अपने साम्राज्य की राजधानी उसने पाटलिपुत्र Pataliputra में स्थापित की थी।

Gupt Saamraajy Ka itihaas Hindi Me

◆ समुद्रगुप्त

चन्द्रगुप्त प्रथम के बाद उसका पुत्र समुद्रगुप्त Samudragupta शासक बना। समुद्रगुप्त की माता कुमार देवी थी। चन्द्रगुप्त का राजतिलक 335ई. में हुआ था। अगर हम Ancient History की बात करें तो समुद्रगुप्त को सबसे श्रेष्ठ शासकों में से एक माना जाता है। समुद्रगुप्त ने भी अपने पिता चन्द्रगुप्त की तरह ही महाराजाधिराज की उपाधि धारण की हुई थी।

उसके शासनकाल को सांस्कृतिक और राजनैतिक रूप से गुप्त साम्राज्य के उदय का काल माना जाता है। समुद्रगुप्त के भी साम्राज्य की जो राजधानी थी वो पाटलिपुत्र थी। समुद्रगुप्त लिच्छवी वंश का नाती था इसीलिए वो खुद को बहुत अधिक गर्वित महसूस करता था और उसने अपने सिक्कों में खुद को लिच्छवी दौहित्र कहा है। समुद्रगुप्त ने दिग्विजय की नीति को अपनाया था।

गुप्त साम्राज्य का इतिहास

Samudragupta महानतम शासकों में से एक है। South की तरफ समुद्रगुप्त का महत्त्वपूर्ण अभियान चला। South में उसकी 12 विजयों का विवरण है। समुद्रगुप्त ने एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया था जो उत्तर में Himalaya से लेकर South में विन्ध्य पर्वत तक तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी से पश्‍चिम में पूर्वी मालवा तक विस्तृत था।

Samudragupta ने सबसे पहले आर्यावर्त के राजाओं को हराया था जिसमें अच्युत, नागसेन मथुरा का नागवंशी शासक , गणपति नाग और कोटकुल शामिल थे। इन पर विजय पाकर Samudragupta ने गंगा और यमुना दो आब में अपना शासन स्थापित किया। आर्यावर्त के शासकों को पराजित करने के बाद Samudragupta ने आटविक राजाओं को पराजित कर के अपने राज्य का विस्तार किया।

गुप्त साम्राज्य का इतिहास हिंदी में

अगर बात करें समुद्रगुप्त के चरित्र की तो वो एक बहुत ही अच्छा शासक तो था ही उसके साथ ही वो एक अच्छा Poet और संगीतज्ञ भी था। विंसेंट स्मिथ ने समुद्रगुप्त को को नेपोलियन की उपाधि दी थी। इसके अलावा Samudragupta को समरशत के नाम से भी जाना जाता है।

समरशत का अर्थ होता है 100 युद्धों का विजेता ।
हरिषेण समुद्रगुप्त के समकालीन कवि था। काव्यालंकार सूत्र में समुद्रगुप्त को चंद्रप्रकाश नाम से जाना गया है। समुद्रगुप्त असहाय तथा अनाथ लोगों को आश्रय देता था।

◆ रामगुप्त

समुद्रगुप्त के 2 बेटे हुए और उसके बेटों के नाम थे रामगुप्त और चन्द्रगुप्त द्वितीय । समुद्रगुप्त की मृत्यु होने के पश्चात उसका बड़ा बेटा रामगुप्त शासक बन खड़ा हुआ मगर रामगुप्त निर्बल एवं डरपोक शासक था। वो युद्ध में शकों के द्वारा हराया गया जिसके बाद उसने उनसे अपमानजनक संधि कर ली और अपनी पत्नी ध्रुवस्वामिनी को शकराज के हाथों में थमा दिया था। समुद्रगुप्त का दूसरा बेटा और रामगुप्त का छोटा भाई Chandragupta निडर और साहसी था।

वो अन्य किसी भेष में शकों के दरबार में गया। जिसके पश्चात रामगुप्त Chandragupta से चिढ़ने लगा। इसीलिए Chandragupta ने रामगुप्त को मौत के घाट उतार दिया। अंततः उसने रामगुप्त की पत्नी ध्रुवस्वामिनी से Shaadi कर ली और गुप्त वंश का शासक खुद को घोषित कर दिया।

◆ चन्द्रगुप्त द्वितीय

समुद्रगुप्त के बाद उसका छोटा पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय 375 – 415ई. Chandragupta उसका उत्तराधिकारी हुआ। चन्द्रगुप्त को अन्य नामों से भी जाना जाता है जो हैं- देव, देवगुप्त, देवराज, देवश्री आदि। चन्द्रगुप्त ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी।

इसके अलावा भी उसने अन्य उपाधियां धारण की हुई थीं जैसे- विकरयांक की उपाधि, परम् भागवत की उपाधि। अपने पिता की तरह चन्द्रगुप्त भी एक अच्छा Poet था। चन्द्रगुप्त द्वितीय को कविराज के नाम से भी सम्बोधित किया गया है। चन्द्रगुप्त द्वितीय ने बौद्ध विद्वान वसुबन्धु को अपना मंत्री बनाया था।

Chandragupta ने नाग की राजकुमारी कुबेर नागा के साथ विवाह किया। उन दोनों ने एक कन्या को जन्म दिया और उसका नाम रखा प्रभावती गुप्त । Chandragupta ने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह वाकाटक के राजा Rudra Sen के साथ किया। उसके पीछे ये कारण था कि Chnadragupta वाकाटकों का सहयोग पाना चाहता था। प्रभावती की बदौलत ही उसने गुजरात और कठियावाड़ में भी सफलताएं हासिल की।

उस समय शक गुजरात एवं मालवा के राज्यों में शासन कर रहे थे। वाकाटक और गुप्त के एक साथ हो जाने से शक थोड़ा Weak हो गए। फिर शकों को पराजित करने के बाद Chandragupta ने एक विशाल और सुदृढ़ राज्य का निर्माण किया Chandragupta की इस विजय के बाद से गुप्तों की राजधानी उज्जैन हो गयी।

गुप्त साम्राज्य इतिहास और रोचक तथ्य

Chandragupta के शासनकाल में ही चीनी यात्री फाह्यान आया था। चन्द्रगुप्त के शासनकाल के समय में नौरत्न हुए जो निम्न हैं-

1. साहित्यकार – कालिदास
2. चिकित्सक – धन्वन्तरि
3. जैन विद्वान – क्षपणक
4. कोशकार – अमरसिंह
5. ज्योतिषाचार्य – शंकु
6. जादूगरी – वेताल भट्ट
7. खगोलशास्त्री- वराहमिहिर
8. कवि – घटकर्पर
9. साहित्यकार – वररुचि

◆ कुमारगुप्त प्रथम

Chandragupta के बाद उसका पुत्र कुमारगुप्त प्रथम गुप्त साम्राज्य का अगला शासक हुआ। Chandragupta की मृत्यु हो जाने के बाद 412ई. में कुमारगुप्त को राजगद्दी पर बैठने का मौका मिला। कुमारगुप्त ने लगभग 40 वर्षों तक शासन किया था।

कुमारगुप्त की माता का नाम ध्रुवदेवी था। ध्रुवदेवी की कोख से जन्मा Chandragupta का वो बड़ा पुत्र था और उसका छोटा भाई गोविंदगुप्त था। गोविंदगुप्त वैशाली का राज्यपाल था।

गुप्त काल और साम्राज्य का इतिहास

कुमारगुप्त ने ही Nalanda University की स्थापना की थी। कुमारगुप्त ने महेन्द्र कुमार, श्री महेन्द्र, श्री महेन्द्र सिंह, महेन्द्रा दिव्य आदि उपाधि धारण की थी। मिलरक्द अभिलेख से ज्ञात होता है कि कुमारगुप्त के साम्राज्य में चतुर्दिक सुख एवं शान्ति का वातावरण विद्यमान था।

कुमारगुप्त प्रथम स्वयं वैष्णव धर्मानुयायी था, किन्तु उसने धर्म सहिष्णुता की नीति का पालन किया। गुप्त शासकों में सर्वाधिक अभिलेख कुमारगुप्त के ही प्राप्त हुए है।
कुमारगुप्त का शासनकाल शांति का काल था।

◆ स्कन्दगुप्त

कुमारगुप्त प्रथम की मृत्यु होने के पश्चात उसका पुत्र स्कंदगुप्त सिंहासन का हकदार हुआ। स्कंदगुप्त ने सबसे पहले पुष्यमित्र को हराकर अपनी विजय का झण्डा लहराया। Starting में स्कंदगुप्त में अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ा जिसका फायदा वाकाटक के शासक ने उठाया। वाकाटक के शासक नरेंद्र सेन ने मालवा पर कब्ज़ा कर लिया। मगर बाद में फिर स्कंदगुप्त ने उसे हराकर मालवा को अपने अधिकार में कर लिया।

स्कंदगुप्त का शासनकाल 12 वर्षों तक रहा। स्कंदगुप्त ने क्रमादित्य, विक्रमादित्य आदि की उपाधियां धारण की। स्कंदगुप्त को शकरोपन कहा गया है।

इतिहास गुप्त साम्राज्य का

स्कंदगुप्त को सबसे अधिक संघर्ष हूण लोगों से करना पड़ा। हूण एक बहुत ही दुर्दांत कबीले थे तथा उनके साम्राज्य से पश्चिम में रोमन साम्राज्य को भी खतरा बना हुआ था। श्वेत हूणों के नाम से पुकारे जाने वाली उनकी एक शाखा ने हिंदुकुश पर्वत को पार करके फ़ारस तथा भारत की ओर रुख किया।

उन्होंने पहले गांधार पर कब्जा कर लिया और फिर गुप्त साम्राज्य को चुनौती दी। पर स्कंदगुप्त ने उन्हे करारी शिकस्त दी और हूणों ने अगले 50 वर्षों तक अपने को भारत से दूर रखा। स्कंदगुप्त ने मौर्यकाल में बनी सुदर्शन झील का जीर्णोद्धार भी करवाया।

स्कंदगुप्त गुप्त वंश का आखिरी सबसे शक्तिशाली शासक हुआ। उसकी मृत्यु के बाद से ही गुप्त साम्राज्य का पतन होना आरंभ हो गया और धीरे धीरे गुप्त साम्राज्य कहीं विलुप्त हो गया।

गुप्त साम्राज्य का पतन/ End of Guptas Empire

467ई. में स्कंदगुप्त की मृत्यु हो गयी और उसी के बाद से गुप्त साम्राज्य बिखरने लगा। गुप्त वंश जीवित 100 वर्षों तक रहा तो मगर उसका कोई वजूद नहीं था। स्कंदगुप्त के बाद के जो शासक हुए वो निम्नलिखित हैं-

◆ पुरुगुप्त – पुरुगुप्त Kumargupta का पुत्र था। स्कंदगुप्त का कोई पुत्र नहीं था। इसीलिए उसके मरने के पश्चात पुरुगुप्त गुप्त साम्राज्य का अगला शासक हुआ।

◆ कुमारगुप्त द्वितीय – पुरुगुप्त अपनी वृद्धावस्था में राजगद्दी पर बैठा जिसकी वजह से उसका शासन हितकारी नहीं साबित हुआ और उसके बाद कुमारगुप्त द्वितीय Kumargupta उसका उत्तराधिकारी हुआ।

◆ बुधगुप्त – पुरुगुप्त का पुत्र बुधगुप्त Buddhgupta था। बुधगुप्त की माता का नाम चन्द्रदेवी था।

गुप्त साम्राज्य के इतिहास

◆ नरसिंहगुप्त बालादित्य – नरसिंहगुप्त बालादित्य बुधगुप्त का छोटा भाई था। इस समय तक गुप्त साम्राज्य तीन भागों में बंट चुका था। मगध में नरसिंहगुप्त, मालवा में भानुगुप्त, बिहार में तथा बंगाल क्षेत्र में वैन्यगुप्त ने अपना स्वतन्त्र शसन स्थापित किया। इन तीनों में सबसे शक्तिशाली शासक नरसिंहगुप्त था।

◆ कुमारगुप्त तृतीय – नरसिंहगुप्त के बाद उसका पुत्र कुमारगुप्त तृतीय Kumargupta l उसका उत्तराधिकारी हुआ। ये मगध के सिंहासन पर बैठा था।

◆ दामोदरगुप्त- कुमारगुप्त तृतीय की मृत्यु के बाद उसका पुत्र राजगद्दी का हकदार हुआ और उसका नाम था दामोदरगुप्त ।

इसके बाद इसका पुत्र महासेनगुप्त अगला शासक हुआ और फिर महासेनगुप्त का पुत्र देवगुप्त अगला शासक हुआ। फिर गुप्त वंश के शासकों ने कुछ वर्षों तक और शासन किया उसके बाद गुप्त साम्राज्य भारतीय इतिहास से अदृश्य हो गया।

◆ माधवगुप्त – माधवगुप्त हर्षवर्धन के समय का शासक था। ये Harsha का अच्छा मित्र था।

गुप्त काल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां/ Important Facts Related To Gupta Empires

1. गुप्त काल में स्वर्ण मुद्रा को दीनार नाम से सम्बोधित किया जाता था।
2. Punchtantra की रचना गुप्त काल में ही हुई थी।
3. शुश्रुत, जिन्होंने आयुर्विज्ञान की रचना की थी वो भी गुप्त काल से ही थे।
4. Child Marriage का प्रचलन भी गुप्त काल से ही आरम्भ हुआ था।
5. दशमलव प्रणाली की शुरुआत गुप्त काल में ही हुई थी। गुप्त काल की मुख्य भाषा संस्कृत थी।

इन्हें भी पढहिये:- प्राचीन भारत का इतिहास – History of Ancient India in Hindi

Conclusion- दोस्तो इस पोस्ट में हमने गुप्त साम्राज्य के इतिहास से जुड़ी संपूर्ण जानकारी का वर्णन किया है। किसी भी प्रकार के प्रतियोगी परीक्षाओं में गुप्त साम्राज्य से जुड़े हुए जो भी प्रश्न पूछे जाते हैं, उन सभी क्षेत्रों को इस पोस्ट में कवर करने का प्रयास किया गया है। उम्मीद करते हैं कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी। इस पोस्ट से जुड़े जो भी सुझाव अथवा प्रश्न है वह आप कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे पूछ सकते हैं।

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