जीवन एक यात्रा है, यहां बस चलते जाना है: यह संसार और यहां रहने वाले लोग ईश्वर की एक बेहतरीन कला का उदाहरण है। संसार का हर एक जीव ईश्वर की कलाकृति है। मानव इस कला का सबसे बेहर आविष्कार है। ईश्वर ने मानव को इस संसार में अपनी जीवन गाथा पूरी करने के लिए भेजा है।

मानव का जीवन महज एक यात्रा है। यह यात्रा उसके जन्म में शुरू होकर उसके मृत्यु पर समाप्त होती है। लोगों को यह वहम होता है कि वे इस दुनिया में हमेशा के लिए रहने वाले हैं। यह मिथ्य़ा उनके मृत्यु के बाद ही समाप्त होती है। ऐसे लोग अपना सारा जीवन धन संचय करने में लगा देते हैं, और जब उस धन के भोग का समय आता है तो वे उसके लिए जीवित नहीं रहते।

जीवन एक यात्रा है, यहां बस चलते जाना है मंज़िल अपने आप मिल जाएगीजीवन एक यात्रा है, यहां बस चलते जाना है मंज़िल अपने आप मिल जाएगी

जीवन एक गाड़ी समान है और समय इसका पहिया

मनुष्य का जीवन उस गाड़ी के समान है जो आप चाहो या न चाहो चलता ही रहता है। इस गाड़ी में समय रुपी पहिया लगा हुआ है, जो कभी रुकता नहीं है। यह अपनी निश्चित चाल से बिना रुके चलते ही जाता है। जिस दिन जीवन की चाल रुकी समझो अपका सफर खत्म और आप ईश्वर को प्यारे हो गए। इसलिए इस जीवन को किसी बोझ के समान नहीं बल्कि ईश्वर के तोहफे के समान जीने की कोशिश करनी चाहिए।

यह जरुरी नहीं कि सफर में सबकुछ आपके सोच के हिसाब से हो। ठीक उसी प्रकार जीवन में भी ये जरुरी नहीं की कि सबकुछ आपके सोच के मुताबिक हो। लेकिन इसके बावजुद आपको हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। आपको खुशी-खुशी जीवन में आए परेशानियों को अपनाना चाहिए।

जीवन यात्रा में भी होते हैं स्टेशन

जैसे रेलयात्रा में आपकी रेल कई स्टेशनों पर कुछ – कुछ समय के लिए रुकती है। ठीक उसी प्रकार जीवनयात्रा में भी कई स्टेशन होते हैं। इन स्टेशनों पर हमारी यात्रा कुछ समय के लिए रुकती जरुर है लेकिन रेल के इंजन की तरह यह चलती भी रहती है। ये स्टेशन आपके छुट्टी के समय होते हैं। इन समयों में आप अपने मन को प्यारे लगने वाले काम करते हैं।

जैसे आप अपने परिवार से मिलते है, कहीं घूमने जाते हैं, किसी की शादी या त्योहार में खुशियां मनाते हैं। फिर कुछ समय बाद जीवन के रेल फिर चल देती है। इससे मानव को समझ जाना चाहिए की कि चाहे खुशियां हो या गम, कुछ भी हमेशा के लिए नहीं है। कुछ दिनों बाद इसे खत्म होना ही है। इसलिए अगर खुशियां आए तो सबकुछ भूल नहीं जाना चाहिए और जब गम आए तो पूरी तरह हताश नहीं हो जाना चाहिए।

हमेशा गतिमान बने रहें

जीवन रुपी यात्रा का आनंद लेने के लिए एक चीज हमेशा ध्यान में रखना चाहिए, वो है गतिमान बने रहना। जी हां, जबतक आप गतिमान रहेंगें आप यात्रा का पूरा मजा ले पाएंगे। जैसे ही आप आराम करने का मन बना लेंगे, आपकी यात्रा बोरिंग हो जाएगी।

जीवन रुपी यात्रा में कुछ लोग जल्द ही थक जाते हैं और दूसरों के उपर लद जाते हैं। इससे दोनों की ही यात्रा बोरिंग हो जाती है। यात्रा में किसी एक के उपर लद जाने से पूरे सफर का ही सत्यानाश हो जाता है।

यात्रा में साथ की होती है काफी जरुरत

जैसे रेलसफर में अकेले सफर करने से बोरियत आती है ठीक उसी प्रकार जीवन के सफऱ में भी अकेले सफर करने में कोई मजा नहीं आता। जीवन के सफर में साथ निभाने के लिए ईश्वर पहले से ही आपको एक परिवार देता है उसके बाद आपको एक समाज देता है।

इस समाज से ही आप कई नए रिश्ते बनाते हैं। ये रिश्ते ही आपको सफर को रंगीन बनाता है। जन्म लेते ही मानव को मां और बाप के रुप में सफर का साथी मिल जाता है। फिर जैसे मनुष्य की रंगत होती है वो उसके अनुसार अपना अन्य सफर का साथी चुनता है।

कुछ लोग काफी कम रिश्ते बनाना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है ज्यादा रिश्ते बनाने से उनके जमा पूंजी बर्बाद हो जाएंगे। यह महज एक मिथ्या है। क्योंकि आजतक कोई भी मानव अपने साथ बचाए पूंजी को कहीं नहीं ले जा सका है।

ऑफिस और ऑफिस से घर तक रह जाते हैं सीमित

बहुत सारे लोगों के अंदर काफी कुछ करने की ईच्छा तो रहती है लेकिन वो अपनी ईच्छा पूरी नहीं कर पाते हैं। ऑफिस और ऑफिस से घर के रूटीन में वो फंसकर रह जाते हैं। इससे वे कुछ भी नया नहीं कर पाते हैं। जिससे वो निराश होकर कभी खुद को तो कभी ईश्वर को कोसने लगते हैं। यह गलत है। हर इंसान को काम तो करना ही चाहिए।

लेकिन अपनी पूरी जिंदगी काम को ही नहीं दे देना चाहिए। ऑफिस का काम और अपने लिए काम करना दोनों दो अलग बातें हैं। इन दोनों में मनुष्य को खुद ही सामंजस्य बैठाना चाहिए। अगर दोनों में सही संतुलन बैठ जाता है तो मनुष्य का जीवन किसी स्वर्ग से कम नहीं होता।

वहीं अगर इन दोनों में संतुलन ना बैठे तो जीवन किसी नर्क से भी कम नहीं। स्वर्ग और नर्क दोनों इसी लोक में है। यह आपको तय करना है कि आपको कहां जाना है।

जीवन यात्रा में थकने का कोई विकल्प नहीं

रेलयात्रा में अगर आप थक जाते हैं तो किसी स्टेशन पर रुक सकते हैं। लेकिन जीवन यात्रा में आपको हमेशा चलते ही रहना है। इस यात्रा में थकने को कोई विकल्प नहीं होता। अगर आप अपनी यात्रा से बोर हो गए हैं तो इसे आप नई दिशा जरुर दे सकते हैं।

लेकिन ऐसा नहीं है कि आप थक कर बैठ सकते हो। जिस दिन आप अपनी जीवन यात्रा से थक जाते हो उसी दिन या यूं कहें उसी क्षण आप अपने सफर को समाप्त कर देते हैं। जीवन यात्रा के समाप्त होने का मतलब है मृत्यू। अगर जीवन में रहते आप जीवन के सच को जान लेते हैं.

Read More:- मौत से डर कैसे भगाए, मृत्यु ही तो जीवन की एक मात्र सच्चाई है

और अपना सारा जीवन ईश्वर की भक्ति में लगाते हैं तो आपको मृत्यू के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। ईश्वर की भक्ति का मतलब साधु बन जाना नहीं होता। बल्कि अपने जीवन में सही कार्य को कर के अपना और लोगों की भलाई करने से होता है।..

नमस्कार,आप सभी के सहयोग से हमारा यह blog, हिन्दी भाषा Me History Se सम्बंधित जानकारी उपलब्ध करवाने वाला एक popular website बनते जा रहा है. इसी तरह अपना सहयोग देते रहिये और हम आपके लिए नईं-नईं जानकारी उपलब्ध करवाते रहेंगे. :)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here