प्राचीन भारत से आधुनिक भारत तक के घटनाक्रम Bharat Ka Itihas In Hindi

आज के इस आर्टिकल में हम आपको प्राचीन भारत से आधुनिक भारत तक के घटनाक्रम के बारे में बताएँगे, ऐसा माना जाता है की Bharat ka Itihas हज़ारो साल पुराना है| पुरानी बातों पर अगर भरोसा करे तो, Mehrgarh एक important place है, जहा नवपाषाण युग [7000 ईसा-पूर्व से 2500 ईसा-पूर्व] के बहुत से अवशेष मिले है|

एक ऐसी सभ्यता, यानि की सिन्धु घाटी सभ्यता जिसकी शुरुआत लगभग 3300 ईसापूर्व से ही हो गई थी, व प्राचीन मिस्र और सुमेर सभ्यता के साथ ही world की सबसे पुरानी प्राचीनतम सभ्यता में से एक है| इस पूरी सभ्यता की लिपि, काफी सफलता पूर्वक अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है|

प्राचीन भारत से आधुनिक भारत तक के घटनाक्रम Bharat ka Itihas hindi में

सिंधु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी। पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर 1900 ईसापूर्व के आसपास इस सभ्यता का अक्स्मात पतन हो गया। 19वी शताब्दी के पाश्चात्य विद्वानों के प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार आर्यों का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर 2000 ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा और पहले पंजाब में बस गया.प्राचीन भारत से आधुनिक भारत तक के घटनाक्रम Bharat Ka Itihas In Hindi

और यहीं ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की गई। आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य bharat में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे वैदिक सभ्यता भी कहते हैं। प्राचीन bharat ke itihas में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका संबंध आर्यों के आगमन से है।

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इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य वेदों के नाम पर किया गया है। आर्यों की Language Sanskriti थी और धर्म वैदिक धर्मया “सनातन धर्म” के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में Foreign invaders द्वारा इस धर्म का नाम हिन्दू पड़ा।

वैदिक सभ्यता के बारे में जानकारी – About Vedic Civilization

वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब (tbhara] और हरियाणा राज्य आते हैं, में विकसित हुई। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल 2000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व के बीच में मानते है, परन्तु नए पुरातत्त्व उत्खननों से मिले अवशेषों में वैदिक सभ्यता से संबंधित कई अवशेष मिले है.

जिससे कुछ Modern scholar यह मानने लगे हैं कि वैदिक सभ्यता भारत में ही शुरु हुई थी, आर्य भारतीय मूल के ही थे और ऋग्वेद का रचना काल 3000 ईसा पूर्व रहा होगा, क्योंकि आर्यो के भारत में आने का न तो कोई पुरातत्त्व उत्खननों पर अधारित प्रमाण मिला है और न ही डी एन ए अनुसन्धानों से कोई प्रमाण मिला है।

प्राचीन भारत से आधुनिक भारत तक के घटनाक्रम

हाल ही में Bhartiya पुरातत्व परिषद् द्वारा की गयी सरस्वती नदी की खोज से वैदिक सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और आर्यों के बारे में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। हड़प्पा सभ्यता को सिन्धुसरस्वती सभ्यता नाम दिया है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता की 2600 बस्तियों में से वर्तमान पाकिस्तान में सिन्धु तट पर मात्र 265 बस्तियां थीं.

जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं, सरस्वती एक विशाल नदी थी। पहाड़ों को तोड़ती हुई निकलती थी और मैदानों से होती हुई समुद्र में जाकर विलीन हो जाती थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में बारबार आता है, यह आज से 4000 years पूर्व भूगर्भी बदलाव की वजह से सूख गयी थी।

ईसा पूर्व की पूरी जानकारी – प्राचीन भारत से आधुनिक भारत तक

ईसा पूर्व 7 वीं और शुरूआती 6 वीं शताब्दि सदी में जैन और बौद्ध धर्म सम्प्रदाय लोकप्रिय हुए। अशोक (ईसापूर्व 265-241) इस काल का एक महत्वपूर्ण राजा था जिसका साम्राज्य Afghanistan से मणिपुर तक और तक्षशिला से कर्नाटक तक फैल गया था।

पर वो सम्पूर्ण दक्षिण तक नहीं जा सका। दक्षिण में चोल सबसे शक्तिशाली निकले। संगम साहित्य की शुरुआत भी दक्षिण में इसी समय हुई। भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व 7 वीं और शुरूआती 6वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां (महाजनपद) विद्यमान थे। अति महत्वतपूर्ण गणराज्यों में कपिलवस्तु के शाक्यआ और वैशाली के लिच्छकवी गणराज्यश थे।

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गणराज्योंव के अलावा राजतंत्रीय राज्या भी थे, जिनमें से कौशाम्बीे (वत्स्), मगध, कोशल, कुरु, पान्चाल, चेदि और अवन्ति महत्वगपूर्ण थे। इन राज्योंो का शासन ऐसे शक्तिशाली व्याक्तियों के पास था, जिन्होंंने राज्य विस्ताार और पड़ोसी राज्योंी को अपने में मिलाने की नीति अपना रखी थी। तथापि गणराज्याशत्म क राज्योंय के तब भी स्पचष्टत संकेत थे जब राजाओं के अधीन राज्यों का विस्तार हो रहा था। इसके बाद bharat छोटेछोटे साम्राज्यों में बंट गया।

आंठवी सदी के बारे में पूरी जानकारी – Complete information about the eighth century

आठवीं सदी में सिन्ध पर अरबी अधिकार हो गाय। यह इस्लाम का प्रवेश माना जाता है। बारहवीं सदी के अन्त तक दिल्ली की गद्दी पर तुर्क दासों का शासन आ गया जिन्होंने अगले कई सालों तक राज किया। दक्षिण में हिन्दू विजयनगर और गोलकुंडा के राज्य थे। 1556 में विजय नगर का पतन हो गया।

1526 में मध्य एशिया से निर्वासित राजकुमार बाबर ने काबुल में पनाह ली और भारत पर आक्रमण किया। उसने मुग़ल वंश की स्थापना की जो अगले 300 सालों तक चला। इसी समय दक्षिणपूर्वी तट से पुर्तगाल का समुद्री व्यापार शुरु हो गया था। बाबर का पोता अकबर धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात हुआ।

भारत का इतिहास के बारे में जानकारी

उसने हिन्दुओं पर से जज़िया कर हटा लिया। 1659 में औरंग़ज़ेब ने इसे फ़िर से लागू कर दिया। औरंग़ज़ेब ने कश्मीर में तथा अन्य स्थानों पर हिन्दुओं को बलात मुसलमान बनवाया। उसी समय केन्द्रीय और दक्षिण भारत में शिवाजी के नेतृत्व में मराठे शक्तिशाली हो रहे थे। औरंगज़ेब ने दक्षिण की ओर ध्यान लगाया तो उत्तर में सिखों का उदय हो गया। औरंग़ज़ेब के मरते ही (1707) मुगल साम्राज्य बिखर गया।

अंग्रेज़ों ने डचों, पुर्तगालियों तथा फ्रांसिसियों को भगाकर भारत पर व्यापार का अधिकार सुनिश्चित किया और 1857 के एक विद्रोह को कुचलने के बाद सत्ता पर काबिज़ हो गए। भारत को आज़ादी 1947 में मिली जिसमें महात्मा गाँधी के अहिंसा आधारित आंदोलन का योगदान महत्वपूर्ण था। 1947 के बाद से भारत में गणतांत्रिक शासन लागू है। आज़ादी के समय ही bharat ka wibhajan हुआ जिससे पाकिस्तान का जन्म हुआ और दोनों देशों में कश्मीर सहित अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।

स्रोत – india की history भारत का इतिहास के बारे में कैसे पता चले

मान्यत विद्वान भारतीय इतिहास को एक संपन्न पर अर्धलिखित इतिहास बताते हैं पर भारतीय इतिहास के कई स्रोत है। सिंधु घाटी की लिपि, अशोक के शिलालेख, हेरोडोटस, फ़ा हियान, ह्वेन सांग, संगम साहित्य, मार्कोपोलो, संस्कृत लेखकों आदि से प्राचीन भारत का इतिहास प्राप्त होता है। मध्यकाल में अलबेरुनी और उसके बाद दिल्ली सल्तनत के राजाओं की जीवनी भी महत्वपूर्ण है। बाबरनामा, आईनअकबरी आदि जीवनियाँ हमें उत्तर मध्यकाल के बारे में बताती हैं।

प्रागैतिहासिक काल (इतिहास महत्वपूर्ण तथ्य )

भारत देश में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण 100,000 से 80,000 साल पुराना है| पाषाण युग जो की भीमबटेका का है, और वह मध्य प्रदेश के रहने वाले थे, उस युग के चट्टानों पर चित्रों का कालक्रम 40,000 ई पू से 9,000 ई पू माना जाता है| पहले यानि की प्रथम स्थायी बस्तियां ने 9,000 साल पहले स्वरुप लिया|

उत्तर पश्चिम में सिन्धु घटी सभ्यता 7000 ई पू विकसित हुई थी, जो 26वीं शताब्दी ईसा पूर्व और 2०वीं शताब्दी के मध्य अपने चरम पर थी| वैदिक सभ्यता का कालक्रम भी ज्योतिष के विश्लेषण से 4000 ई पू तक जाता है| राष्ट्र के रूप में उदय भारत को एक सनातन राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यह मानव सभ्यता का पहला राष्ट्र था। श्रीमद्भागवत के पञ्चम स्कन्ध में Bharat Rashtra की स्थापना का वर्णन आता है।

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भारतीय दर्शन के अनुसार सृष्टि उत्पत्ति के पश्चात ब्रह्मा के मानस पुत्र स्वायंभुव मनु ने व्यवस्था सम्भाली। इनके दो पुत्र, प्रियव्रत और उत्तानपाद थे। उत्तानपाद भक्त ध्रुव के पिता थे। इन्हीं प्रियव्रत के दस पुत्र थे। तीन पुत्र बाल्यकाल से ही विरक्त थे। इस कारण प्रियव्रत ने पृथ्वी को सात भागों में विभक्त कर एकएक भाग प्रत्येक पुत्र को सौंप दिया।

Prehistoric time (history important facts)

इन्हीं में से एक थे आग्नीध्र जिन्हें जम्बूद्वीप का शासन कार्य सौंपा गया। वृद्धावस्था में आग्नीध्र ने अपने नौ पुत्रों को जम्बूद्वीप के विभिन्न नौ स्थानों का शासन दायित्व सौंपा। इन नौ पुत्रों में सबसे बड़े थे नाभि जिन्हें हिमवर्ष का भूभाग मिला। इन्होंने हिमवर्ष को स्वयं के नाम अजनाभ से जोड़कर अजनाभवर्ष प्रचारित किया।

यह हिमवर्ष या अजनाभवर्ष ही प्राचीन भारत देश था। राजा नाभि के पुत्र थे ऋषभ। ऋषभदेव के सौ पुत्रों में भरत ज्येष्ठ एवं सबसे गुणवान थे। ऋषभदेव ने वानप्रस्थ लेने पर उन्हें राजपाट सौंप दिया। पहले bharat warsh का नाम ॠषभदेव के पिता नाभिराज के नाम पर अजनाभवर्ष प्रसिद्ध था। भरत के नाम से ही लोग अजनाभखण्ड को भारतवर्ष कहने लगे।

प्राचीन भारत का इतिहास – history of ancient India

1000 ईसा पूर्व के बाद 16 महाजनपद उत्तर भारत में मिलते है| 500 ईस्वी पूर्व के बाद, कोई स्वतंत्र राज्य बन गए| ऊतर में मौर्य वंश,

उत्तर में मौर्य वंश, जिसमें चन्द्रगुप्त मौर्य और अशोक सम्मिलित थे, ने bharat के सांस्कृतिक पटल पर उल्लेखनीय छाप छोड़ी | १८० ईसवी के आरम्भ से, मध्य एशिया से कई आक्रमण हुए, जिनके परिणामस्वरूप उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप में इंडोग्रीक, इंडोस्किथिअन, इंडोपार्थियन और अंततः कुषाण राजवंश स्थापित हुए |

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तीसरी शताब्दी के आगे का समय जब bharat पर गुप्त वंश का शासन था, भारत का स्वर्णिम कालकहलाया। दक्षिण भारत में भिन्नभिन्न समयकाल में कई राजवंश चालुक्य, चेर, चोल, कदम्ब, पल्लव तथा पांड्य चले | विज्ञान, कला, साहित्य, गणित, खगोल शास्त्र, प्राचीन प्रौद्योगिकी, धर्म, तथा दर्शन इन्हीं राजाओं के शासनकाल में फलेफूले |

मध्यकालीन Bhaarat का इतिहास – history of Medieval India

१२वीं शताब्दी के शुरुआत में, भारत पर इस्लामी आक्रमणों के बाद, उत्तरी व केंद्रीय भारत का अधिकांश भाग दिल्ली सल्तनत के शासनाधीन हो गया, और उसके बाद उपमहाद्वीप मुगल वंश के अधीन| दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य शक्तिशाली निकला| हालांकि, विशेषतः तुलनात्मक रूप से, संरक्षित दक्षिण में, अनेक राज्य रह गए, अथवा अस्तित्व में भी आए|

आधुनिक भारत का इतिहास – History of Modern India

भारत में उपनिवेश और ब्रिटिश राज 17वीं शताब्दी के मध्यकाल में पुर्तगाल, डच, फ्रांस, ब्रिटेन सहित अनेकों युरोपीय देशों, जो कि भारत से व्यापार करने के इच्छुक थे, उन्होनें देश में स्थापित शासित प्रदेश, जो कि आपस में युद्ध करने में व्यस्त थे, का लाभ प्राप्त किया।

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अंग्रेज दुसरे देशों से व्यापार के इच्छुक लोगों को रोकने में सफल रहे और 1840 ई तक लगभग संपूर्ण देश पर शासन करने में सफल हुए। 1857 ई में ब्रिटिश इस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध असफल विद्रोह, जो कि भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम से जाना जाता है, के बाद भारत का अधिकांश भाग सीधे अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गया।

भारत का विभाजन व स्वतंत्रता साथसाथ २०वीं शताब्दी के शुरुआत में अंग्रेजी शाशन से स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए काफी संघर्ष चला| इस पुरे संघर्ष के परिणामस्वरुप १५ अगस्त, १९५७ ई को भारत आज़ाद हुआ| जब भारत ने अंग्रेज़ी शाशन से स्वतंत्रता प्राप्त की, मगर देश को विभाजन भी कर दिया| तदुपरान्त २६ जनवरी १९५० ई को भारत एक गणराज्य बना|

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