बेस्ट मोटिवेशन : सन 1947 की बात है | हरियाणा राज्य के एक छोटे से गाव जिसका नाम अब्दुलापुर था | अब्दुलापुर का एक छोटा सा निवासी जो की आजादी के समय अपने परिवार से अलग होगया था | उसके परिवार के सदस्य पाकिस्तान में रह गए थे | और वह इंसान अपने जान बचाता हुआ भारत म आगया था | इस इन्सान का नाम था बलवंत राय |

जब यह भारत आया तब बलवंत की उम्र 6 साल थी | एक अनजाने देश में आके बलवंत बहुत अकेलापन महसूस कर रहा था | इस अनजान देश में उसका कोई अपना नहीं था | बलवंत का इस देश में रहना मरने के बराबर होगया था | ना था उसके पास रहने के लिए घर था ना ही खाने के लिए रोटी और नाही पाने के लिए कपडा | जिसके वजह से उसका हर दिन बहुत मुश्किल होगया था इस देश में |

मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा सके बेस्ट मोटिवेशनमेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा सके

किसी शायर ने सही कहा है जिसका कोई नि होता उसका भगवान होत्ता है | एक दिन बलवंत यूही सड़क पे घूम रहा था तभी बलवंत की तबियत खराब हो गयी | उस समय वहा पर एक और इंसान खड़ा था उसने बलवंत की बुरी हालत देख उसे अपने साथ अपने घर ले आया |

उस इंसान ने बलवंत का एक हकीम को बुलाकर इलाज करवाया | हाकिम के इलाज़ से बलवंत सही होगया | उस इंसान ने बलवंत से पूछा की कहा से आया है वो | बलवंत ने अपनी सारी दुखबरी कहानी सुनाई , कैसे वोह आजादी क समय अपने परिवार से अलग होगया और अब वोह इस अनजान देश म अकेला है |

उस इंसान ने बलवंत को कहा की अन तुम मेरे साथ रहो | बलवंत ने मना कर दिया की वोह किसी का एहसान नि लेना चाहता | यह कहकर बलवंत वह से निकल गया | बलवंत हमेशा की तरह इधर उधर घूमता रहता | ना रहने की जगह ना सोने की जगह |

बलवंत एक दिन पुल के निचे से गुजर रहा था तभी वहा उसने देखा की बहुत लोग कपडे प्रेस करने का काम कर रहे है | बलवंत ने सोचा की क्यों ना वोह येह काम करे | बलवंत के पास पैसे ना होंने के कारन उसने वहा एक इंसान के नीचे काम करने लगा |

Do hard work so silently that your success

कुछ महीनो काम करने क बाद बलवंत ने इतने पैसे इकठे क्र लिए थे की वोह अपना काम शुरू कर सकता है | बलवंत ने अपना काम शुरू कर दिया साथ हे बलवंत गली गली जाकर लोगो के कपडे प्रेस करने लग गया | यह काम करते करते बलवंत को 8 वर्ष हो गए थे | बलवंत जिस गली सरोज गुजरता था वहा पर जो लोग रहते थे वे सब सरकारी कर्मचारी थे |

बलवंत दिल का बहुत साफ़ था , हर किसी के साथ उसकी बोलचाल सही थे | एक दिन सरकारी कर्मचारी ने उसे कहा की चल में तुझे कार्यालय में लगवा देता हू | बलवंत ने कहा जनाब में तोह पड़ा लिखा भी नि हू | बलवंत ने बोला जब पड़ने की उम्र थी , तब में अपने परिवार से बिचड़ गया |

जिसके बाद मेरा इस देश में कोई ना था | एक अनाथ की तरह ज़िन्दगी जी रहा हू , पिछले 10 वर्ष से | उस सरकारी कर्मचारी ने कहा की तुम चलो मेरे साथ , हमारे वहा तुम्हारे जैसे इंसान की जररूत है जो काम करने की लगन रखता हो | बलवंत ने उस इंसान की बात मान ली |

और उसके साथ चला गया | बलवंत ने वह जाकर पुरे दिल से काम किया और सीखा , साथ से सभी सरकारी कर्मचारियों के साथ अपनी पहचान बना ली थी | जिसकी वजह से बलवंत पुरे कर्रालय में परसिद्ध हो गया था | अब तक बलवंत की उम्र 17 हो गयी थी | तभी 17 उम्र में बलवंत का विवाह हो गया था |

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हरियाणा के एक छोटे राज्य से थी लड़की , लड़की का परिवार भी गरीब था | बलवंत पुरे लगन से काम करता रहा | बलवंत को एक लड़का हुआ जिससे उसके घर में खुशी आ गयी थी | बलवंत रोज अपने बच्चे के लिए कुछ लेकर आता था |

बलवंत अब सही ज़िन्दगी जी रहा था | बलवंत की कर्रालय में भी सही जगह बन गयी थी | बलवंत रोज रोज अपना काम समय पे जाता था और समय पे वापिस आता था | बलवंत के काम करने की लगन को देख कर , कर्रालय के बड़े अधिकारी ने बलवंत की प्रमोशन कर दी |

जिसके बाद बलवंत अब एक सही जगह पे आगया था | बलवंत फिर वी समय पे जाया करता था क्योकि बलवंत लगन से काम करता था और उसे अपनी पहचान बनानी थी इस देश में | कठिन परिश्रम करता गया बलवंत और उचियाँ प्राप्त कर लीं | बलवंत का अब एक सुखी परिवार था |

बलवंत का लड़का भी बड़ा होगया था वो भी अब स्कूल जाया करता था | बलवन्त ने अपना घर भी बना लिया था | बलवंत के घर में मानो खुशियाँ आ गयी थी | जिस इन्सान ने इतने समय दुःख में निकला हो उसके लिए तोह यह समय किसी चमत्कार से कम नहीं था | बलवंत दिन रात मेहनत करता गया |

बलवंत की उम्र अब 25 साल हो गयी थी | इतनी कम उम्र में इतना कुछ पा लेना एक चमत्कार था | बलवंत की एक दिन बहुत तबियत खराब हो गयी थी  , वह ऐसी स्थिति में था की वह काम पे नि जा सकता था | पर बलवंत का उस दिन कर्रालयमें पहुँचाना बहुत जरुरी था |

मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा सके

बलवंत जैसा भी था चला गया | बलवंत ने वहा दिल लगाकर काम किया किसी को भी नि पता लगने दिया की वह आज सही नहीं है | बलवंत की उस दिन प्रोमोशन हो गयी थी और अब वह अपने कर्रालय का इंस्पेक्टर बन गया था | उसके सभी साथियों की खुशी थी की एक मेहनती इंसान हमारे इस कर्रालय का इंस्पेक्टर बना है | सभ लोग बहुत खुश थे बलवंत की इस कामयाबी को देख कर | सभी को अच्छा महसूस हो रहा था की बलवंत ने कठिन परिश्रम करके इस उपलब्दी को पाया है |

बलवंत कर्रालय से जब अपने घर गया थो उसने अपने घर जाके येह बात अपने घर वालो को बताई की उसका प्रमोशन हो गया है वह इन्स्पेक्टर बन गया है | बलवंत के सभी घर वाले बहुत खुश थी | ऐसा लग रहा था की बलवंत घर में दीवाली का त्यौहार है | बलवंत के घर में पठाके जलने लगे |

बलवंत बहुत बड़ा आदमी बन गया था | उसके पास अब अपना घर भी था , अपना परिवार था , अपने लोग साथ थे , अपनी गाड़ी थी मतलब सब कुछ था | बलवंत के घर में हर समय खुशियाँ रहने लग गयी थी | बलवंत आज बहुत अच्छा महसूस कर था जैसे की इतनी समय का परिश्रम आज काम आया है | जो दुःख उसने अपने माँ बाप से बिछड़ने पे हुए थे , उसे पल को भुला के उसने येह सब हासिल किया | और आज उसे बहुत खुशियाँ है , सब उसके साथ है |

किसी ने सही कहा है “ क्रम करता जा , फल की प्रतिक्षा मत कर “ | अंत में एक बात और कठिन परिश्रम करने वाले कभी ज़िन्दगी में हारते नहीं |

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