मौत से डर कैसा, मृत्यु ही तो जीवन की एक मात्र सच्चाई है: मृत्यु, यह शब्द सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कभी आपने सोचा है, ऐसा क्यूं होता है। आखिर लोग मौत से इतना क्यूं डरते हैं। मृत्यु से बड़ी सच्चाई इस पूरे जीवन में कुछ भी नहीं है। ये एक ऐसी सच है जिसे आपके न चाहते हुए भी आपको मानना होता है। फिर नाहक ही लोग इससे डरते हैं। मृत्यु को भी जीवन के अन्य सच्चाई की तरह अपना बनाना ही सही है। यह बात अभी तक मानव के दिमाग में नहीं बसी है। यही वजह है कि वे मृत्यु का नाम सुनते ही डर से कांप जाते हैं।

जो आया है उसे जाना है

प्रकृति का एक नियम है और वो यह है कि जो भी इस धरती पर आया है उसे कभी न कभी जाना है। यह बात निश्चित है। इसे कोई भी बदल नहीं सकता। अगर किसी मनुष्य का जन्म हुआ है तो उसकी मृत्यु निश्चित है। इस बात को कोई भी बदल नहीं सकता। लोग जन्म लेते हैं, इस धरती पर भोग करते हैं और अंत में अपने कर्मों के अनुसार मृत्यु को प्राप्त करते हैं। ऐसा अभी तक कोई नहीं हुआ जिसे जन्म के बाद मृत्यु प्राप्त न हुई हो। इसलिए वो लोग जो नाहक ही अपने आप को मृत्यु विजेता समझते हैं, वे बड़े बाले मुर्ख होते हैं।

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मौत को डर नहीं, सच के रुप में देखो

लोग अक्सर सन्यासियों से यह पूछते हैं कि बाबा आपको मौत से डर नहीं लगता। इस पर सन्यासी बड़े ही हंसमुख अंदाज में जवाब देता है, मौत तो जीवन का सच है फिर उससे क्या डरना। डर की असली वजह मौत नहीं होती, बल्कि जीवन से होने वाला अतिरिक्त प्यार होता है। मनुष्य अपने जीवन और अपने संबंधियों के प्यार – माया में इस कदर फस जाता है कि उसके खोने के सोच से ही कांप जाता है। मौत जो कि मनुष्य को उसके जीवन के साथ-साथ, उसके प्रियवर, सभी भौतिक चीजें और सभी रिश्तेदारों से दूर करता है। उससे भला मनुष्य कैसे नहीं डरेगा।

मौत से डर भगाने का मार्ग

कुछ लोग कहते हैं कि मौत तो डरावनी होती ही है तो फिर इससे कोई भला कैसे न डरे। वैसे लोगों को सही मार्गदर्शन की जरुरत है। असल में ऐसे लोग वहीं होते हैं जिन्हें अपने जीवन से काफी लोभ होता है। आप कहेंगे जीवन से लोभ किसे नहीं होता।

जीवन से लोभ सिर्फ उनलोगों को होता है जो ये सोचते हैं कि ये दुनिया अमर है। वे अपने पूरे जीवन काल में अपने लिए पूंजी इकट्ठे करते हैं ताकि अपने और अपने प्रियवर को हमेशा अपने साथ और जीवित रख सकें। उनके लिए ये बता दूं कि आज तक कोई ऐसा हुआ नहीं जो कि मौत को टाल सकता हो। मौत पर विजय पाने की कई कहानियां लिखी गई हैं। ये सब सिर्फ मिथक है। इससे सिर्फ और सिर्फ मनुष्य अपना दिल बहला सकता है और कुछ भी नहीं। जब मौत आनी है वो आकर रहेगी। इस मार्ग में ना कोई दवा और ना कोई डॉक्टर कुछ कर सकता है।

मौत से डर कैसे भगाए , मृत्यु ही तो जीवन की एक मात्र सच्चाई है

मौत के डर से जीना मत छोड़ो

धरती पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मौत की डर से जीना छोड़ देते हैं। उन्हें लगता है मौत तो आनी ही है फिर जीकर क्या फायदा। उनसे मेरा यह कहना है कि मौत हर किसी से जीवन की एक ऐसी सच्चाई है जिसे कोई बदल नहीं सकता। इसका मतलब यह नहीं कि आप जीना ही छोड़ दीजिए। जीवन ईश्वर ने आपको इसलिए दिया है कि आप धरती पर आओ और अपने सगे संबंधियों के साथ अपना काम करे।

लेकिन कुछ लोग जो मजे करने के साथ दूसरों के लिए परेशानी का कारण बन जाते हैं। वे खुद को ईश्वर जैसा बलशाली समझने लगते हैं। उनके लिए ये मौत एक ऐसी सच्चाई की तरह है जो उन्हें उनकी सही जगह दिखाता है। अंत में सभी मनुष्य की मौत होनी है, यह तय है। लेकिन इस बात को जानते हुए भी जो लोग बिना डरे अपने जिंदगी को मजे से जीते हैं वही असल मायने में जिंदगी से मोहब्बत करते हैं।

जीवन में कोई न कोई उद्देश्य होना चाहिए

धरती पर हर कोई किसी न किसी उद्देश्य से आया है। किसी को अपना उद्देश्य जल्द समझ आ जाता है तो कुछ को काफी देर से। इस समय अवधि के कारण ही मौत के डर का लोगों में विकास होता है। जिस मनुष्य को अपने आने का सही कारण जल्द पता चल जाता है वह तुरंत ही अपने मौत के डर पर विजय पा लेता है।

लेकिन जिन मनुष्यों को अपने आने के कारण का पता नहीं होता वो सिर्फ पैसे कमाने, लोगों में अपनी प्रतिष्ठा कमाने और शक्ति बनाने में पूरा जीवन लगा देते हैं। इसकी वजह से ही वे अपने जीवन में डर-डर के जीते हैं कि कहीं किसी दरवाजे पर मौत की दस्तक ना हो जाए।

मौत के डर का कई लोग उठाते हैं फायदा

आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि मौत के डर का कई लोग फायदा भी उठाते हैं। आपको शायद विश्वास न हो पर ये सच है। पंडित, तांत्रिक, ओझा आदि ऐसे लोग होते हैं जो मौत के डर का फायदा उठाते हैं। ये लोग सीधे-साधे लोगों को मौत का डर और ईश्वर की शक्ति की बात कर के लोगों को बेवकुफ बनाते हैं। जो लोग इन पर विश्वास करते हैं उन्हें खुद से ये बात पुछनी चाहिए क्या  पंडित, तांत्रिक और ओझा जो उन्हें ये बात बता रहा है क्या वो खुद अपने मौत को टाल सकता है क्या भला।

मौत जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है जिसे कोई नहीं बदल सकता है। प्रकृति का नियम है जो धरती पर आया है उसका जाना तय है। गीता में कहा भी गया है –

जो हुआ, वह अच्छा हुआ। जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है। जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा।

तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाये थे, जो तुमने खो दिया?

तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर आए,

जो लिया यहीं से लिया। जो दिया, यहीं पर दिया।

खाली हाथ आये, खाली हाथ चले।

जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का था, परसों किसी और का होगा।

परिवर्तन संसार का नियम है।

हे मानव, तु कर्मशील बन, परमात्मा हर कण-कण में है।

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