लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त कैसे करें: आपके मन में कभी कभी सवाल आता होगा कि लक्ष्य क्यों होना चाहिए ?हमारे जीवन में लक्ष्य की ऐसी क्या जरूरत है ?तो चलिए  मैं आपको इसका उत्तर बताता हूँ ।

साथियों कल्पना करें कि आप किसी रेलवे स्टेशन  पर जाते हैं और वहां टिकट काउंटर पर जाकर टिकट देनेवाले से कहते हैं कि मुझे टिकट दे ?उसका जवाब आता है कहाँ की टिकट ?और आप निरुत्तर रह जाते हो तो क्या वो आपको किसी भी जगह की टिकट दे पाएगा ? विचार करें कि आप कहीं भी जा पाएंगे?निश्चित रूप से आपका उत्तर होगा ‘ना’।

लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त कैसे करें (Goal Setting in Hindi)लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त कैसे करें (Goal Setting in Hindi)

एक अन्य स्थिति की कल्पना करते है।

एक व्यक्ति सुबह घर से निकलता है बिना किसी उद्देश्य बिना किसी लक्ष्य के । वो कहाँ जायेगा?बस इधर उधर भटकता रहेगा । और हो सकता है कि वो शाम को लौटकर घर आये या ना भी आये ।

ऊपर की इन दोनों लघु कहानियों में आपने देखा कि व्यक्ति बिना किसी लक्ष्य ,बिना किसी मिशन ,बिना किसी विज़न के कुछ भी नहीं कर सकता। ऊपरी उदाहरणों से आपको इतना तो पता चल जिस होगा कि जीवन में लक्ष्य की कितनी उपयोगिता है। आप को  इस संसार में कुछ भी करने के लिए सर्वप्रथम  लक्ष्य का निर्धारण करने होगा । जिसे हम अंग्रेजी की भाषा में गोल सेटिंग कहते हैं ।

विश्व में जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं उनके पास कुछ न कुछ लक्ष्य जरूर था । जिसके नक्शे कदम पर चलते हुए उन्होंने सफलता ले नए आयाम स्थापित किये ।

जीवन में किसी लक्ष्य का होना मतलब की आपके पास में जाने के लिए कोई दिशा है जिस तरफ आप जा सकते हैं । लेकिन जीवन में लक्ष्य का न होना इस बात का संकेत है कि आप के पास कोई दिशा नहीं है जिस तरफ आप जा सको ।

Importance of Goal Setting in Hindi | लक्ष्य निर्धारित का महत्व

किसी शायर की कुछ पंक्तियाँ है-

लक्ष्य पर ही तू डटेगा
किसी हाल में नहीं झुकेगा,
आँधी में चट्टान बनेगा गिर गया तो
फिर उठेगा,एक नहीं सौ बार गिरेगा गिरकर तू हरबार उठेगा,संघर्ष तो आता जायेगा
दिन-प्रतिदिन बढ़ता जायेगा,अँधेरो से भिड़ता जायेगा
सूरज बनकर तू छाएगा।

अब आपको मैं बताता हूं कि लक्ष्य किस प्रकार के हो सकते हैं । लक्ष्य कुछ भी हो सकता है । मैं आपको कुछ उदाहरण देकर बताता  हूँ–  एक माँ-बाप के लिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाकर एक अच्छा इंसान बनाना,समाज में अपनी अच्छी  पहचान बनाना।

एक विद्यार्थी के लिये – एक नई कला सीखना, परीक्षा में अव्वल आना, खेल के मैदान में जीत हासिल कर माँ-बाप को गौरवान्वित करना। एक कंपनी में काम कर रहे व्यक्ति के लिए – मेहनत कर प्रमोशन पाना,  खुद का घर खरीदना, अपने परिवार को पूरी दुनिया घुमाना, इत्यादि ।

एक गृहिणी के लिए – अपने परिवार की बेहतर देख रेख करना या खाली समय में पार्ट टाइम नौकरी कर अपने पति की चिंताओं को कम करना । यह कितना भी छोटा या बड़ा हो सकता है। दोस्तों  जीवन में लक्ष्य का बहुत बड़ा रोल है ।

जीवन में लक्ष्य की अथवा जीवन में लक्ष्य का निर्धारण

बिना लक्ष्य के आपका जीवन निरर्थक है। आप कुछ भी नहीं कर पाएंगे?आपने ये पंक्तियां तो अवश्य सुनी होगी –

लक्ष्य न ओझल होने पाए कदम मिलाकर चल

सफलता तेरे चरण चूमेगी आज नहीं तो कल।

ये पंक्तियां हिंदी के राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त की एक कविता की पंक्तियाँ है। जरा इनके भावों पर जाने का प्रयास कीजिये ।

इसमें मैथिलि शरण गुप्त जी कहते हैं लक्ष्य न ओझल( अर्थात आँख से परे होना ) होने पाए । अब यदि किसी के पास लक्ष्य ही नहीं है तो क्या होगा?इसका सीधा सा जवाब है कुछ भी नहीं । जब लक्ष्य ही नहीं है तो आप किसकी तरफ कदम मिलाकर चलोगे?.

जब चलोगे ही नही तो सफलता कैसे मिलेगी?ये सब कड़ियाँ आपस में जुडी हुई है । यदि आपके पास कुछ करने का विजन है तो  ही आप उसकी तरफ चल पाओगे और जब चलोगे तभी कुछ कर पाओगे । जब कुछ करोगे तब निश्चित रूप से कुछ न कुछ तो पाओगे ।

कई लोगो ने लक्ष्य तय तो कर लिए होते हैं लेकिन उनके के मन में यह सवाल आता है कि लक्ष्य को हासिल कैसे करें?तो साथियों लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे पहले आपके मन में उस लक्ष्य के प्रति सकारात्मक सोच होनी चाहिए । यदि आप सकारात्मक सोच के साथ उस लक्ष्य के  प्रति निरन्तर चलते रहते हैं तो आप निश्चित रूप से सफल होंगे । इसकी गारंटी में देता हूँ।

जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है

कई लोग जिन्होंने अपने लक्ष्य तो तय कर लिए होते हैं परंतु उस लक्ष्य को हासिल करते करते कुछ विसंगतियों या अवरोधों का सामना अगर उनको करना पड़ जाए तो वो बोखलाहट में उस लक्ष्य को छोड़ देते हैं । ये समस्या कई लोगों के साथ होती है।

देखिये अगर आपने कोई कार्य शुरू किया है तो उसमें स्वाभाविक है कि कुछ समस्याएं तो आएगी । और आप को उन समस्याओं का सामना करके उन पर काबू पाना होगा । अन्यथा आपकी पिछली मेहनत पूरी की पूरी व्यर्थ जायेगी । इसलिए जितना हो सके समस्याओं से घबराएं नही व उनके समाधान के प्रयास करें । बाकि दुनिया की बातों पर ध्यान न देते हुए बिलकुल एक मदमस्त हाथी की तरह अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहें।

अब्दुल कलाम जी कहा करते थे जीवन में ऊँचे लक्ष्य तय करो। संसार में जिसने भी कुछ अपने लिए प्रेरणादायी कार्य  किया है उसने अपने लक्ष्य ऊँचे रखे होंगे ।साल तभी तो वो इतने बड़े सफलता के आयाम स्थापित कर पाया। मेरे मतानुसार लक्ष्य बड़े रखो और उसके लिए छोटे छोटे प्रयासों से लक्ष्य की तरफ बढ़ो।

क्यों ज़रूरी है लक्ष्य निर्धारित

जैसा कि हम जानते है कि यात्रा भले ही हज़ार क़दमों की हो लेकिन वो शुरू तो हमेशा पहले ही कदम से होती है ।इसीलिए अपने लक्ष्य के लिये छोटे छोटे स्टेप्स का निर्धारण करें और निरन्तर  चलते रहें । क्योंक़ी जिसने भी निरन्तरता बनाई है वो हमेशा से ही सफल रहा है।

हम सुनते आये हैं कि UPSC भारत के कठिन एग्जाम्स में सेवक हैं । लेकिन क्या इसको लोग क्लियर नहीं करते । बिलकुल करते हैं । लवकिन कर वही पाते है जिन्होंने अपने प्रदर्शन और अध्ययन कल के दौरान निरंतरता बनाए रखी। सुनने में कई बातें आती है.

कि फलां इंसान ने 18 घण्टे प्रतिदिन पढ़ाई की तब जाकर आईएएस बन पाया । तो दोस्तों ऐसा कुछ भी नहीं होता । यदि आप निरन्तर रूप से दिन के 2 से 3 घण्टे भी  मेहनत करते है तो भी आप इस एग्जाम को क्रैक कर सकते है। इसके लिए एक ही शर्त है निरन्तरता । आपके अध्ययन में निरन्तरता का होना बहुत ही आवश्यक है। ऐसा नही  कि 10 दिन तो दिन में 12-12 घंटे पढ़ लिए और बीच में 10 दिन घूम लिए और किताब से कुछ संपर्क नही बिठा पाए।

लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें प्राप्त करें

कुछ लोग पढ़ते है और बड़े विचारमग्न होकर लेकिन कुछ लोग पढ़ते तो 10 घण्टे हैं लेकिन उसका आउटपुट 1 घण्टे भी नहीं निकलकर आता। तो वो 10 घण्टे पढ़ाई किस काम की। इसलिए अपनी क्षमता अनुसार अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर पढ़ें और एकाग्रचित होकर पढ़ें । बात सिर्फ विद्यार्थियों की ही नही है इस संसार के प्रत्येक प्राणी को अपने कार्य में एकाग्रता होनी जरूरी है बिना एकाग्रता के कुछ भी संभव नहीं ।

एकाग्रता और लक्ष्य निर्धारण को और अच्छे तरीके से समझने के लिए मैं आपको एक और उदाहरण बताते हुए ले चलता हूँ –

बात महाभारत काल की है । गुरु द्रोणाचार्य अपने सभी शिष्यों को धनुर्विद्या की

शिक्षा दे रहे थे । सभी शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए गुरु ने एक मिटटी  की चिड़िया बनायी और उसे एक पेड़ पर रख दिया । ततपश्चात सभी शिष्यों को बुलाया और बोला कि इस चिड़िया की लक्ष्य बनाते हुए निशाना लगाओ । एक एक करके सभी शिष्य आ रहे थे निशाना साधने के लिए।

सर्वप्रथम दुर्योधन आये गुरु ने पूछा बताओ दुर्योधन तुम्हे क्या दिख रहा है तो दुर्योधन ने बताया गुरूजी मुझे पेड़ की पत्तियां ,चिड़िया  और आप सभी लोग दिख रहे हैं। गुरु ने बोला तुम जाओ। आगे युधिष्ठिर आये उनसे भी गुरु ने पूछा तुम्हे क्या दिख रहा है ?तो दुर्योधन बताते हैं कि मुझे तो चिड़िया दिख रही है।

Importance of Goals in Hindi

गुरु ने कहा तुम भी जाओ। ऐसे एक-एक सारे शिष्य वापस हटते रहे और अंततः अर्जुन का नम्बर आता है। गुरु द्रोण अर्जुन से पूछते हैं कि बताओ दुर्योधन तुम्हे क्या दिख रहा हैं ?तो अर्जुन कहता है कि गुरुदेव मुझे तो सिर्फ चिड़िया की आँख दिखाई दे रही हैं । गुरु एक बार फिर पूछते हैं कि बताओ अर्जुन और क्या क्या दिख रहा हैं ?.

लेकिन अर्जुन फिर बोलता है कि मुझे तो सिर्फ चिड़िया की आँख दिखाई दे रही है ?गुरूजी बहुत खुश होते हैं और बोलते हैं-शाबाश अर्जुन अब निशाना  लगाओ। अर्जुन ने बाण छोड़ा और वो बाण सीधा चिड़िया की आँख पे जाकर लगा।

इस तरह गुरु द्रोण की परीक्षा में एकमात्र सफल होने वाला शिष्य अर्जुन रहा ।

जरा सोचिए अर्जुन ही क्यों इस अग्नि परीक्षा में सफल रहा?

इसके पीछे एक ही कारण है और वो है उसकी लक्ष्य के प्रति एकाग्रता ।

तो साथियों सिर्फ लक्ष्य निर्धारण करने से कुछ नहीं होगा । सफलता पाने के लिए प्रतिबद्ध होकर लक्ष्य की तरफ बढ़ना होगा ।

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इसलिए जीवन में कुछ करना चाहते हो तो सबसे पहले आप अपने मन मस्तिष्क में कुछ अपने लक्ष्य निर्धारित करें । बिना लक्ष्य के कुछ भी नहीं हो सकता।

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