Chhattisgarh History in hindi : छतीसगढ़ का इतिहास शत वर्षों पुराण है यहाँ के एकान्त वनों में ऋषि-मुनि आश्रम बना कर रहते थे। इनमें वाल्मीकि, अत्रि, अगस्त्य, सुतीक्ष्ण मुख्य थे। इसीलिये वनवास की यात्रा प्रारम्भ करते ही राम इन सबके आश्रमों में गये। राम (Ram) के काल में भी कोशल राज्य (छत्तीसगढ़)  उत्तर कोशल और दक्षिण कोशल में विभाजित था। कालिदास (kalidas) के रघुवंश (Raghuvansh) काव्य में उल्लेख है कि राम ने अपने पुत्र लव को शरावती का और कुश को कुशावती का राज्य दिया था।छतीसगढ़ का विख्यात इतिहास About Chhattisgarh History in hindi

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छत्तीसगढ़ के इतिहास का पौराणिक काल Mythological Era of Chhattisgarh History

यदि हम छत्तीसगढ़ के इतिहास (History of Chattisgarh) पर दृष्टि डालें तो प्रतीत होता है कि छोटा नागपुर से लेकर बस्तर तथा कटक से ले कर सतारा तक के बिखरे हुये राजवंशों को संगठित कर राम ने वानर सेना बनाई हो।  “सामान्य रूप से इस विश्वास की परम्परा चली आ रही है.

कि रतनपुर (Ratanpur) के राजा इतने प्राचीनतम काल से शासन करते चले आ रहे हैं कि उनका सम्बन्ध हिन्दू पौराणिक कथाओं Mythological stories में वर्णित पशु कथाओं (fables) से है। (चारों महान राजवंश) सतारा के नरपति, कटक के गजपति, बस्तर के रथपति और रतनपुर के अश्वपति हैं” (A Reeport on the Suba or Province of Chhattisgarh – written in 1820)

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अश्व और हैहय पर्यायवाची हैं। श्री एग्न्यू का मत है कि कालान्तर में ‘अश्वपति’ ही हैहय वंशी हो गये। इससे स्पष्ट है कि इन चारों राजवंशो का सम्बन्ध अत्यन्त प्राचीन है तथा उनके वंशों का नामकरण चतुरंगिनी सेना के अंगों के आधार पर किया गया है। बस्तर के शासकों का ‘रथपति’ होने के प्रमाण स्वरूप आज भी दशहरे में रथ निकाला जाता है तथा दन्तेश्वरी माता की पूजा की जाती है।

About Chhattisgarh History in hindi

यह राम की उस परम्परा का संरक्षण है जब कि दशहरा के दिन राम ने शक्ति की पूजा कर लंका की ओर प्रस्थान किया था। राजाओं की उपाधियों से यह स्पष्ट होता है राम ने छत्तीसगढ़ प्रदेश (Chattisgarh State) के तत्कालीन वन्य राजाओं को संगठित किया और चतुरंगिनी सेना का निर्माण कर उन्हें नरपति, गजपति, रथपति और अश्वपति उपाधियों से सम्भोधित किया। इस प्रकार रामायण काल से ही छत्तीसगढ़ प्रदेश राम का लीला स्थल तथा दक्षिण भारत में आर्य संस्कृति का केन्द्र बना।

‘दक्षिण कोशल’ अब छत्तीसगढ़ कहलाता है। इस क्षेत्र की  महानदी (जिसका नाम उस काल में ‘चित्रोत्पला‘ था) का मत्स्य पुरा  महाभारत के भीष्म पर्व तथा ब्रह्म पुराण के भारतवर्ष वर्णन प्रकरण में चर्चित है। वाल्मीकि की रामायण में भी छत्तीसगढ़ के बीहड़ वनों तथा महानदी का स्पष्ट विवरण है।

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स्थित सिहावा पर्वत के आश्रम में निवास करने वाले श्रृंगी ऋषि ने ही अयोध्या में राजा दशरथ के यहाँ पुत्र्येष्टि यज्ञ करवाया था जिससे कि तीनों भाइयों सहित भगवान श्री राम का पृथ्वी पर जन्म हुआ। राम के समय में यहाँ के वनों में ऋषि-मुनि निवास करते थे और उस दौरान राम ने भी अपने वनवास के काल यहाँ निवास किया था यह भी छत्तीसगढ़ के प्राचीन काल का एक अहम पड़ाव है।

छतीसगढ़ का विख्यात इतिहास Chhattisgarh History

बौद्ध (Buddha) धर्म की महायान शाखा के संस्थापक बोधिसत्व नागार्जुन का आश्रम सिरपुर (श्रीपुर) में ही था। इस समय छत्तीसगढ़ पर सातवाहन वंश की एक शाखा का शासन था। महाकवि कालिदास (kalidas) का जन्म भी छत्तीसगढ़ में हुआ था ऎसा माना जाता है।

प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ दक्षिण-कौसल के नाम से प्रसिद्ध इस प्रदेश में मौर्यों, सातवाहनों, वकाटकों, गुप्तों, राजर्षितुल्य कुल, शरभपुरीय वंशों, सोमवंशियों, नल वंशियों, कलचुरियों का शासन था। छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय राजवंशो का शासन भी अनेक  जगहों पर मौजूद था। क्षेत्रिय राजवंशों में प्रमुख थे: बस्तर के नल और नाग वंश, कांकेर के सोमवंशी और कवर्धा के फणि-नाग वंशी।

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बिलासपुर जिले के पास स्थित कवर्धा रियासत में चौरा (Chaura) नाम का एक मंदिर है जिसे लोग मंडवा-महल भी कहा जाता है। इस मंदिर में सन् 1349 ई. का एक शिलालेख (inscription) है जिसमें नाग वंश (Naag Dynasty) के राजाओं की वंशावली दी गयी है। नाग वंश के राजा रामचन्द्र (Ramachandr) ने यह लेख खुदवाया था। इस वंश के प्रथम राजा अहिराज कहे जाते हैं। भोरमदेव के क्षेत्र पर इस नागवंश का राजत्व 14 वीं सदी (14th century) तक कायम रहा।

छत्तीसगढ़ की पृष्ठभूमि Background of Chhattisgarh History

छत्तीसगढ़ का शब्द का इस्तेमाल सर्व प्रथम चरण कवि ने दलाराम राव ने किया था। उसके बाद राजनीतिक तौर पर राजसिंह देव ने रतनपुर (Ratanpur)  में इस शब्द का प्रयोग किया। छत्तीसगढ़ का पहले नाम दक्षिण कोशल था और छत्तीसगढ़ का इतिहास (History of Chattisgarh) 4 शताब्दी ईस्वी तक पुराना है।

इसका पौराणिक इतिहास रामायण और महाभारत काल तक से जुड़ा है। मध्य युग में चालुक्य साम्राज्य ने खुद को बस्तर में स्थापित किया। अन्नमदेव नाम के पहले चालुक्य शासक थे, जिन्होंने सन् 1320 में बस्तर में राजवंश स्थापित किया। सन् 1741 में मराठों ने  शासकों से यह राजवंश छीन लिया। मराठों ने राज्य जीतने के बाद वर्ष 1745 में रतनपुर (Ratanpur) घराने के अंतिम वंशज रघुनाथ सिंह (Raghunath Singhजी को क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर किया।

अनन्तः सन् 1758 में मराठों ने छत्तीसगढ़ पर विजय हासिल की और बिंबाजी भोंसले को शासक घोषित किया गया। बिंबाजी भोंसले के देहांत के बाद मराठों ने सूबा प्रणाली का पालन करना शुरु कर दिया। यह वो दौर था जब सब तरफ अशांति और कुशासन था। मराठा (Maratha) सेना ने तब यहाँ बड़ी पर लूट पाट की थी।

जिले Chhattisgarh History

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय यहाँ सिर्फ 16 जिले थे पर बाद में 2 नए जिलो की घोषणा की गयी जो कि नारायणपुर व बीजापुर थे। पर इसके बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने 15 अगस्त 2011 को 9 और नए जिलो कि और घोषणा कि जो 1 जनवरी 2012 से अस्तित्व में आ गये, इस तरह अब छत्तीसगढ़ में कुल 27 जिले हैं।

कवर्धा जिला • कांकेर जिला (उत्तर बस्तर) • कोरबा जिला • कोरिया जिला • जशपुर जिला • जांजगीर-चम्पा जिला • दन्तेवाड़ा जिला (दक्षिण बस्तर) • दुर्ग जिला • धमतरी जिला • बिलासपुर जिला • बस्तर जिला • महासमुन्द जिला • राजनांदगांव जिला • रायगढ जिला • रायपुर जिला • सरगुजा जिला • नारायणपुर जिला • बीजापुर • बेमेतरा • बालोद जिला • बलोदाबाज़ार • बलरामपुर • गरियाबंद • सूरजपुर • कोंडागांव जिला • मुंगेली • सुकमा

छतीसगढ़ का ऐतिहासिक सौंदर्य  Historical beauty of Chhattisgarh History

मन्त्रमुग्ध कर देने वाला छत्तीसगढ़ राज्य (Chhattisgarh state) प्राकृतिक सौंदर्य में अत्यधिक सम्पन्न है। और यहां शहरी और ग्रामीण जीवन का खास ताल-मेल है। यह मध्य भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है और ये यहां के लोगों, संस्कृति और त्यौहारों में पूर्णतः प्रतीत होता है। यह राज्य मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उन जिलों को जोड़ कर बना है जहां छत्तीसगढ़ी भाषा प्रचलित है।

यहाँ के जनसंख्या का ज़्यादातर हिस्सा आदिवासी (Tribal) लोगो का हैं, जो हिंदी और छत्तीसगढ़ी बोलते हैं। ये लोग कर्मठता का पुरज़ोर चित्रण करते है और खदानों और कारखानों में काम करते हैं। आदिवासी लोग बहुत प्रतिभाशाली और रचनात्मक होते हैं और उनकी यह विशेषता उनके पारंपरिक हस्तशिल्प (handicrafts) एवं अनेक कलाओं (Arts)  में साफ झलकती है। यह सब हमेशा से छत्तीसगढ़ के इतिहास (History of Chattisgarh) का मुख्य अंग है।

साहित्यिक युग  Era of literature- Chhattisgarh History

छत्तीसगढ़ के इतिहास (History of Chattisgarh) में साहित्य की सार्थकता की भी कीमती आवश्यकता और स्थान है। साहित्यिक काल में यह युग प्रमुख है- छत्तीसगढ़ी गाथा युग:सन् 1000 से 1500 ई. तक छत्तीसगढ़ी भक्ति युग – मध्य काल, सन् 1500 से 1900 ई. तक छत्तीसगढ़ी आधुनिक युग: सन् 1900 से आज तक यह विभाजन किसी प्रवृत्ति की सापेक्षिक अधिकता को देखकर किया गया है। एक और उल्लेखनीय बत यह है कि दूसरे आर्यभाषाओं के जैसे छत्तीसगढ़ी में भी मध्ययुग तक सिर्फ पद्यात्मक रचनाएँ हुई है।

छत्तीसगढ़ एक प्रमुख प्रदेश Chattisgarh a prominent state

छत्तीसगढ़ आज भारत का एक प्रमुख प्रदेश है। जो हर तरह से सम्पन्न और सम्पूर्ण है। छतीसगढ़ (Chattisgarh) की विविधता और भव्यता प्रमाणित अनेक इतिहासकारों द्वारा सदा प्रमाणित होती आई है। छत्तीसगढ़ हिंदुस्तान का एक अभिन्न अंग है। जो भारत में प्राणस्वरूप है।

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