Delhi History hindi : भारत का एक सबसे प्रमुख नगर दिल्ली को आकर्षक भाषा में दिल वालों का भी शहर कहा जाता है। Delhi भारत की राजधानी है यह तो आप सभी जानते है  लेकिन दिल्ली भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और प्रमुख हिस्सा है। दिल्ली चार महानगरों में से एक है इसलिए दिल्ली को Metro City भी कहा जाता है। इसमें New Delhi भी शामिल है जो भारत की राजधानी (Capital) है।

दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों ‘ Delhi History ‘ कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं। यहाँ की जनसंख्या किसी भी अन्य नगर की जनसंख्या की तुलना में सबसे अधिक  है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं : हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का इतिहास भी खास महत्व रखता है।Delhi History hindi Me -दिल्ली का इतिहास - दिल्ली की हिस्ट्री की पूरी जानकारी

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Delhi History -दिल्ली का इतिहास – मध्यकालीन दिल्ली का इतिहास

History of Delhi दिल्ली का इतिहास अत्यधिक सम्पन्न और सजीव। दिल्ली सबसे पुराना शहर है। यहाँ तक की हमारे पौराणिक गाथाओं में दिल्ली के प्राचीन नाम का उल्लेख है। दिल्ली के ही पुराने नाम इंद्रप्रस्थ (Indraprasth) को पांडवों की बसाई नगरी कहा जाता है, जो उनकी राजधानी थी। दिल्ली का इतिहास महाभारत काल से अस्तित्व में है। समय के साथ-साथ इंद्रप्रस्थ के आसपास आठ शहर : लाल कोट, दीनपनाह, किला राय पिथौरा, फिरोज़ाबाद, जहांपनाह, तुगलकाबाद और शाहजहानाबाद बसते रहे दिल्ली का नाम दिल्ली कैसे पड़ा, इसके पीछे भी एक रोचक इतिहास है।

 दिल्ली का इतिहास महाभारत के जितना ही पुराना है। इस शहर को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था, जहां कभी पांडव रहे थे। ” Delhi History “ समय के साथ-साथ इंद्रप्रस्थ के आसपास आठ शहर : लाल कोट, दीनपनाह, किला राय पिथौरा, फिरोज़ाबाद, जहांपनाह, तुगलकाबाद और शाहजहानाबाद बसते रहे।

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शहर का इतिहास महाभारत के जितना ही पुराना है। इस शहर को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था, जहां कभी पांडव रहे थे। समय के साथ-साथ इंद्रप्रस्थ के आसपास आठ शहर : लाल कोट, दीनपनाह, किला राय पिथौरा, फिरोज़ाबाद, जहांपनाह, तुगलकाबाद और शाहजहानाबाद बसते रहे।

Delhi History hindi Me -दिल्ली का इतिहास – दिल्ली की हिस्ट्री

ईसा पूर्व 50 में Maurya राजा थे जिनका नाम था धिल्लु। उन्हें दिलु भी कहा जाता था। माना जाता है कि यहीं से इस नाम का अपभ्रंश नाम की  अपनाते हुए नाम दिल्ली पड़ गया। लेकिन कुछ इतिहास कार कहते हैं कि तोमरवंश के एक राजा धव ने इलाके का नाम ढीली रख दिया था क्योंकि किले के अंदर लोहे का खंभा ढीला था और उसे बदला गया था। Delhi History

यह ढीली शब्द बाद में दिल्ली हो गया। एक और तर्क यह है कि तोमरवंश के समय इस्तेमाल किये जाने वाले सिक्को के नाम से जुड़ कर दिल्ली का नाम पड़ा। वहीं, कुछ लोगों का यह मानना है कि दिल्ली शहर को हजार-डेढ़ हजार वर्ष पहले हिंदुस्तान की दहलीज़ माना था दहलीज़ का अपभ्रंश दिल्ली हो गया।

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दिल्ली’ या ‘दिल्लिका’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले उदयपुर में प्राप्त शिलालेखों पर पाया गया। यह दिल्ली का इतिहास और भी रोचक बनाता है।इस inscription का समय 1170 इसवीं निर्धारित किया गया। महाराज पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का अंतिम हिंदु सम्राट माना जाता है|

Delhi History दिल्ली की पृष्ठभूमि Background of Delhi

अजमेर के चौहान राजाओ ने 1180 में Red Fort पर कब्ज़ा कर लिया और इसका नाम किला राय पिथोरा कर दिया | किला Rai Pithora के संग्रहालय और दीवारों के प्राचीन अवशेषों के अनुसार दिल्ली Delhi के इस पहले नगर को 10वी सदी के Prithviraj Chauhan ने खोजा था | चौहान राजा पृथ्वीराज तृतीय ने 1192 में मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद गौरी Muhmmad Gori को हराया था | 1206 में Delhi दिल्ली गुलाम वंश की राजधानी बनी | दिल्ली का पहला सुल्तान एक Qutubuddin Aibak

गुलाम था जिसने अपने पद को बढ़ाते हुए पहले सेनापति ,और फिर दिल्ली का सुल्तान बना | कतुबुद्दीन Qutubuddin Aibak  ने अपनी जीत का उत्सव मनाने के लिए Qutub Minar  क़ुतुब मीनार का निर्माण आरम्भ  करवा दिया था लेकिन उसके पूरा होने से पहले ही उसकी मौत हो गयी। Qutub Minar दिल्ली के इतिहास का मान आज भी बनाएँ हुए है।

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क़ुतुब परिसर में उसने कुवत-अल-इस्लाम का निर्माण करवाया जो मौजूदा मस्जिदों में सबसे पुरानी है | ऐसा भी कहा जाता है कि उसने क़ुतुब परिसर में बने 27 जैन मन्दिरों को तुडवाया था और उस मलबे में  निकले  उत्कृष्ट नक्काशीदार स्तंभों और निर्माण सामग्री से मस्जिद का निर्माण करवाया जिसे आप आज भी देख सकते है | 1206 इसवीं के बाद दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate) की राजधानी बनी।

दिल्ली का इतिहास की कथा Story of Delhi History

दिल्ली का इतिहास इतना प्रमुख इसलिए है की खिलज़ी वंश, तुगलक़ वंश, सैयद वंश और लोधी वंश समेत कुछ अन्य वंशों ने  यहाँ शासन किया। ऐसा मानतव्य है कि आज की आधुनिक दिल्ली (नई Delhi)बनने से पहले दिल्ली सात बार उजड़ी और विभिन्न स्थानों पर स्थापित हुई, जिनके कुछ हिस्से  आधुनिक दिल्ली मे अब भी मौजूद हैं। Delhi History

प्रारंभ में उन्होंने कलकत्ते (Kolkata) से शासनहिन्दू राजाओं से लेकर मुस्लिं सुल्तानों तक, दिल्ली का शासन एक शासक से दूसरे शासक के हाथों जाता रहा। शहर की मिट्टी खून, कुर्बानी और देश-प्रेम से सींची हुई है। प्राचीन काल से ही पुरानी ‘हवेलियां’ और इमारतें खामोश खड़ी हैं किन्तु उनका खामोशियां अपने मालिकों और उन लोगों को सदाएं देती हैं जो सैंकड़ों वर्षों पहले उनमें रहे थे।

दिल्ली का तुग़लक़ वंश The Tugalaq Dynasty of Delhi History

1398 में तैमुर लंग Taimur ने भारत पर आक्रमण किया | उसने तुगलक वंश Tuglaq Dynasty के नसीरुद्दीन मुहम्मद की सेना को हराकर 1398 में दिल्ली Delhi में प्रवेश किया और शहर को लुटा और सम्पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया |  उसने 1 लाख कैदियों को भी मार दिया था |

दिल्ली का मुग़ल वंग The Mughal Dynasty of Delhi-

मुगल वंश का दिल्ली पर था बोलबाला 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध First Battle of Panipat में फरगना के पूर्व शासक बाबर Babar ने लोधी वंश के अंतिम शाषक अफ़ग़ान लोदी को हरा दिया और मुगल वंश (The Mughal period) की स्थापना की जिसने दिल्ली के प्राचीन काल मे  ,आगरा और लाहोर पर राज किया |16वी सदी के मध्य में मुगलो Mughal के शासन में एक व्यवधान आया जिसमे शेरशाह सुरी ने बाबर के बेटे हुमायु को हरा दिया और उसे फ़ांस भाग जाने को बाध्य किया | शेरशाह सुरी Shershah Suri ने दिल्ली Delhi के छठे नगर पुराना किला का निर्माण करवाया |

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शेरसाह सुरी Shershah Suri की मौत के बाद 1545 में उसके पुत्र इस्लाम शाह Islam Shah ने उत्तरी भारत से दिल्ली Delhi तक की बाग़डोर संभाली | इस्लाम शाह Islam Shah  ने 1533 तक दिल्ली Delhi पर राज किया और उस समय सुरी वंश Suri Dynasty का सेनापति हिन्दु राजा हेम चन्द्र विक्रमादित्य उर्फ़ हेमू था | हेमू ने विद्रोहियों के खिलाफ लगातार 22 लड़ाइयाँ जीती और दो बार  Akbar की सेना को हराया |

अकबर (Akbar) की सेना को हराकर 1556 में हेमू दिल्ली के सिंहासन पर बैठ गया और कुछ समय के लिए उत्तरी भारत में हिन्दू राज स्थापित किया | उसे 1398 में तैमुर लंग Taimur ने भारत पर आक्रमण किया | उसने तुगलक बंश Tuglaq Dynasty के नसीरुद्दीन मुहम्मद की सेना को हराकर 1398 में दिल्ली Delhi में प्रवेश किया और शहर को लुटा और बर्बाद कर उजाड़ कर दिया |

Delhi History in hindi

उसने 1 लाख कैदियों को भी मार दिया | की उपाधि मिली और पुराना किला पर उसका राज्याभिषेक हुआ | अब अकबर ने अपनी किस्मत खराब होने के कारण राजधानी आगरा बना दी | 17वी सदी में मुगल बादशाह शाहजहा ने शाहजनाबाद नगर का निर्माण करवाया जिसे वर्तमान में पुरानी दिल्ली Old Delhi कहते है | इस शहर में उसने लाल किला और जामा मस्जिद बनवाई | जब शाहजहा ने आगरा से फिर अपनी राजधानी स्थानातरित की तो इस बार पुरानी दिल्ली Old Delhi को अपनी राजधानी बनाया |

दिल्ली के तत्कालीन शासकों ने इसके स्वरूप में कई बार बदलाव किया। इसके बाद आया मुग़लो का शासन (Period of Mughal Rulers) आरंभिक मुग़ल शासकों ने आगरा को अपनी राजधानी बनाया

अकबर के पोते शाहजहाँ (1628-1678) ने सत्रह-वीं सदी के मध्य में इसे सातवीं बार बसाया जिसे शाहजहानाबाद के नाम से पुकारा गया। शाहजहानाबाद को आम भाषा  में पुराना शहर या पुरानी दिल्ली कहा जाता है। पुरानी दिल्ली (Old Delhi)1638 के बाद मुग़ल सम्राटों की राजधानी रही। दिल्ली का आखिरी मुगल बादशाह Bahadur Shah Zafar था

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1658 में औरंगजेब Aurangzeb ने शालीमार बाग़ बनवाया | 1680 के बाद मुगल साम्राज्य Mughal Dynasty का प्रभाव कम होता गया और हिंदु मराठा तीव्र गति से अपना साम्राज्य बिछा रहे थे |  1739 में मुगलों की युद्ध में भारी हार के कारण फारस के नादिर शाह ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर उसको लूट लिया | वो धन दौलत के साथ कोहीनूर को भी ले गया | मुगल बादशाह मुह्हमद शाह प्रथम ने नादिर शाह से लुटी हुयी धन दौलत छीन ली और उसे भारत छोड़ने को मजबूर कर दिया | मुगल अब इतने कमजोर हो गये कि फिर कभी शाषन नही कर पाए |

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1757 में अब्दाली ने भारत पर आक्रमण किया और दिल्ली Delhi का शासन नजीउददौला को देकर अफ़ग़ानिस्तान चला गया | मराठो ने नाजिब को हराकर दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया | 1761 में मराठा अब्दाली से पानीपत के तीसरे युद्ध में हार गये और फिर से अब्दाली ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिए | मराठा प्रभुत्व के उत्तर भारत में खत्म होने के दस वर्ष बाद महादजी शिंदे के नेतृत्व में फिर से मराठो ने दिल्ली Delhi पर कब्ज़ा कर लिया और मुगल राजा शाह आलम द्वितीय Shah alam को 1772 में सिंहासन पर बिठाया |

1803 में दूसरे अंग्रेज-मराठा युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी East India Company  ने मराठा सेना को दिल्ली की लड़ाई में हरा दिया और दिल्ली से मराठा शासन खत्म हो गया | परिणामस्वरूप Delhi दिल्ली अब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के कब्जे में आ गया | 1857 के विद्रोह के बाद दिल्ली की सत्ता सीधे ब्रिटिश सरकार के हाथ में आ गयी | 1857 की क्रांति में दिल्ली में  काफी क्षति हुयी जिसके बाद  नाम मात्र के मुगल बादशाह Bahadur Shah zafar बहादुर शाह जफर को रंगून भेज दिया और बाकी बची मुगल प्रदेश को ब्रिटिश सरकार का हिस्सा बना दिया |

दिल्ली के इतिहास में ब्रिटिश सरकार की भूमिका The Role of British Government in history of Delhi-

1911 में ब्रिटिश सरकार की राजधानी कलकत्ता घोषित की गयी लेकिन उसी वर्ष दिल्ली दरबार Delhi Durbar में किंग जोर्ज V ने दिल्ली को फिर से राजधानी बनाने का एलान किया |पुरानी दिल्ली Old Delhi के कई हिस्से मिलाकर नई दिल्ली का निर्माण किया गया जिसमे सरकारी इमारतो का निर्माण किया गया |  1911 में उपनिवेश राजधानी को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया एवं अनेक आधुनिक निर्माण कार्य करवाए गये। साथ ही साथ इस दौरान दिल्ली शहर का सबसे अधिक विकास हुआ।

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स्वतंत्रता के दौरान दिल्ली का इतिहास अत्यधिक सम्प्पन्न रहा है,1947 में भारत की आज़ादी (independence)  के बाद इसे अधिकारिक रूप से भारत की राजधानी घोषित कर दिया गया। दिल्ली में कई राजाओं के साम्राज्य के उदय तथा पतन के साक्ष्य आज भी विद्यमान हैं। सच्चे मायने में दिल्ली हमारे देश के भविष्य, भूतकाल एवं वर्तमान परिस्थितियों का मेल-मिश्रण हैं। तोमर शासको मे दिल्ली कि स्थापना का शेय अनंगपाल को जाता है।

स्वतंत्रता के दौरान दिल्ली का इतिहास  History of Delhi during Independence

भारत के स्वतंत्र होने के बाद 1949 में भारत सरकार की विधानसभा सीट घोषित की गयी | स्थानों पर स्थापित हुई, जिनके कुछ हिस्से  आधुनिक दिल्ली का हिस्सा है। तब से अब तक दिल्ली के जीवन में अनेक पड़ाव आए जिनको भारत के ऐतिहासिक नगर दिल्ली ने सफल रूप में पर किया।

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