Holi Festival इतिहास, महत्व, होली त्यौहार कब और क्यों मनाते है: आज हम आपको in सभी चीजो की जानकारी देंगे hindi में होली कैसे मनाते है, होली का महत्व, दीपावली क्यों मनाई जाती है, होली मनाने का ढंग , होली निबंध, होलिका कौन थी, होली के बारे में जानकारी, होलिका के पति का नाम.

 हमारे देश में अलग-अलग धर्मों के लोगों की अपनी-अपनी अलग सभ्यताएं हैं, इसी तरह विभिन्न सभ्याताओं में कई अलग अलग त्योहार भी मनाए जाते हैं, और इन्ही त्योहारों में से एक है रंगों का पवित्र त्योहार होली. धूमधाम से मनाया जाने वाला त्योहार होली, वसंत ऋतु के आने का संदेश लेकर आता है और इस त्योहार को भारत और नेपाल दोनों देशों के लोगों द्वारा मनाया जाता है.

होली का यह पवित्र त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के याद के रूप मे मनाया जाता है क्योंकि इसके बारे में इतिहासकारों का कहना है कि इस दिन नृसिंह ने हिरणाकश्यप नाम के एक असुर का वध किया था. होली का त्योहार हमारे देश में दो हिस्सों में मनाया जाता है हर बार बड़ी होली से पहले छोटी होली को मनाने की परंपरा है और छोटी होली के दिन होलिका दहन किया जाता है. होलिका दहन में पवित्र अग्नि को जलाया जाता है।

क्यों करते हैं होलिका दहन क्या है इसका महत्वHoli Festival इतिहास, महत्व, होली त्यौहार कब और क्यों मनाते है

होलिका दहन भी भक्त प्रहलाद और उसके पिता हिरण्कश्यप से ही जुड़ा हुआ है। होलिका दहन के बारे में एक कथा प्रचलित है कि हिरण्कश्यप की बुआ होलिका को यह वरदान मिला हुआ था कि उसे अग्नि जला नहीं सकती, इसलिए हिरण्कश्यप ने प्रहलाद को मारने के लिए एक योजना बनाई और होलिका से प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठने के लिए कहा। होलिका ने ऐसा ही किया और वह प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर जलती आग में बैठ गई.

आग ने होलिका को जला दिया और प्रहलाद बच गया। इस बारें में यह भी कहा जाता है कि होलिका के पास एक कपड़ा था जिसे ओड़ने के बाद आग किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकती थी और जब होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठी तो वह कपड़ा उड़कर प्रहलाद के उपर चला गया और होलिका आग में ही जल गई। इसीलिए होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है।

क्या है हिरण्कश्यप और प्रहलाद की कहानी

प्रह्लाद हिन्दू धर्म के पुराणों में कही गई कथाओं के अनुसार असुर हिरण्यकशिपु और उसकी पत्नी कयाधु दानवी का पुत्र था . असुर कुल में जन्म लेने के बाद भी प्रहलाद भगवान का भक्त था और दत्तात्रेय, शंड तथा मर्क उसके शिक्षक थे. प्रहलाद की भगवान की भक्ति.

से नाराज होकर उसके असुर पिता हिरण्यकश्प ने प्रह्लाद को ईश्वर भक्ति से विचलित करने के लिए अनेक उपाय किए और तरह-तरह की यातनाएं दीं पर प्रहलाद अपने पथ पर दृढ़ रहा. अंत में प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु  नृसिंह अवतार में आए और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।

होलिका दहन कैसे करें

इस त्योहार को मनाने के लिए शाम के समय अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर अलाव जलाकर समाज में सुख और शांति की प्रार्थना करते हैं. वहीं कुछ जगहों पर होलिका दहन की अलग ही प्रक्रिया है, वहां होलिका और प्रहलाद का पुतला बनाकर आग में रखा जाता है।

होलिका दहन में एक रस्म यह भी है कि इसमें भक्त पवित्र अग्नि में जौ को भूनकर अपने प्रियजनों को देते हैं और इसके बदले में कुछ ना कुछ जरूर लेते है.  इस बारे में कहा जाता है कि आग में जौ जलाने से हर तरह की समस्याएं हमेशा के लिए दूर हो जाती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. आपको बता दें कि होलिका दहन की यह पूजा पूरे उत्तर भारत में की जाती है.

होली को लेकर एक और कथा भी है प्रचलित

होली को लेकर एक और कथा प्रचलित है,कि हिमालय पुत्री पार्वती चाहती थीं कि उनका विवाह भगवान शिव से हो जाए, लेकिन इसमें एक बाधा थी कि शिवजी उस समय अपनी तपस्या में लीन थे। उस समय  कामदेव पार्वती की सहायता के लिए आगे आए। उन्होंने पार्वती की सहायता करने के लिए प्रेम बाण चलाया, जिसके बाद भगवान शिव की तपस्या भंग हो गई।

ऐसा करने से भगवान शिवजी को बहुत क्रोध आया और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी. जिसके बाद कामदेव का शरीर भगवान शिव की क्रोध ज्वाला में भस्म हो गया। फिर शिवजी ने पार्वती को देखा, और फिर पार्वती की आराधना सफल हुई और शिव जी ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया।

कैसे मनाई जाती है ब्रज की होली

होली के पवित्र त्योहार हमारे देश में संस्कृतियों के अनुसार कई अलग-अलग तरह से मनाया जाता है वैसे ही ब्रज के बरसाना गांव में होली खेलने की एक अलग ही परंपरा है जिसे लठमार होली कहा जाता है। देश वासियों के लिए ब्रज की होली वैसे भी काफी ख़ास मस्ती भरी होती है क्योंकि इसे भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम से जोड़ कर देखा जाता है।

यहां की होली में नंदगांव के पुरूष और बरसाने गांव की महिलाएं भाग लेती हैं. क्योंकि भगवान कृष्ण नंदगांव के थे और राधा बरसाने गांव की थीं। बरसाना और नंद गांव की होली को अक्षय कुमार की फिल्म टॉयलेट में भी फिल्माया गया है.

इसमें नंदगांव की टोलियां जब पिचकारियां लेकर  बरसाना पहुंचती हैं तो उनपर बरसाने गांव  की महिलाएं खूब लाठियां बरसाती हैं यही यहां की होली मनाने की परंपरा है और पुरुषों को इन लाठियों से बचना होता है ,साथ ही महिलाओं को रंगों से भिगोना होता है।

Holi Festival कब और क्यों मनाते हैं?

इस लेकर नंदगांव और बरसाने के लोगों का विश्वास है कि होली की लाठियों से किसी को चोट नहीं लगती है और अगर चोट लगती भी है तो लोग घाव पर मिट्टी मलकर फ़िर से शुरु हो जाते हैं। इस मौके पर भांग और ठंडाई का भी खास इंतज़ाम होता है। होली के त्योहार पर नंदगांव की होली को देखने के लिए दूरदराज से भी लोग आते हैं, यहां की होली देश भर में प्रसिद्ध है

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संगीत में होली

भारतीय संगीत में होली का विशेष महत्व है और शास्त्रीय संगीत में धमार का होली से गहरा संबंध है। भारतीय सिनेमा में बनने वाली कई फिल्मों में होली को लेकर गाने बनाए गए हैं। साथ ही ध्रुपद, धमार, छोटे व बड़े ख्याल और ठुमरी में भी होली के गीतों का सौंदर्य देखते ही बनता है।

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