Odisha History Hindi ओड़िशा का इतिहास के बारे में पूरी जानकरी

ओड़िशा का इतिहास Odisha History हिस्ट्री ऑफ़ ओड़िशा इन हिंदी- ओड़िशा का इतिहास विश्व प्रसिद्द है क्युकी इसका सम्बन्ध सम्राट अशोक से है। पूर्व काल में ओड़िशा को कलिंग के नाम से जाना जाता था। जब सम्राट अशोक विजय प्राप्त करते हुए आगे बढ़ रहे थे कलिंग में  भी कर उन्होंने विजय प्राप्त कर ली पर.

यहाँ बहुत सारे लोग मारे गए जब यहाँ के सब पुरुष वीरगति को प्राप्त हो गए थे उनकी स्त्रियाँ भी रण भूमि में अपने बच्चो को ले कर लड़ने गयी ऐसी स्थिति देख सम्राट का दिल द्रवित हो गया और उन्होंने दोबारा कभी हिंसा करने का प्रण  किया और बौद्ध धर्म अपना लिया। क्यूकि कलिंग में ही कर उनकोअहिंसा परमो धर्म :”का ज्ञान मिला इसलिए यहाँ अनेक शिलालेख भी देखने को मिलते है।Odisha History Hindi ओडिश का इतिहास के बारे में पूरी जानकरी

ओडिशा जिसे पहले उड़ीसा के नाम से जाना जाता था भारत का 11वा सब से ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य है। जिसका क्षेत्रफल भारत में नौवे सब से बड़े राज्य के स्थान पर है। ओडिशा की स्थापना26 जनवरी  1950 को हुई थी। यहाँ पर चावल की खेती अधिक होती है पर यहाँ साइक्लोन भी आते रहते है जिस से फैसले कई बार बर्बाद हो जाती है। एक ऐसा ही चक्रवात यहाँ 1 अक्टूबर 1999 में भी आया था जिसमे लगभग 10000 लोग मारे गए थे।

ओड़िशा के प्रमुख स्थानों में कोणार्क,पूरी और भुवनेश्वर है। कोणार्क का सूर्य मंदिर बहुत प्रसिद्द है जिसे देखने लोग दूरदूर से आते है।

छोटा सा परिचय ओडिशा का A Quick  View Of  Odisha History

  • प्रथम मुख्यमंत्री कृष्णा चंद्र गजपति 
  • वर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक 
  • राजधानी  –   भुवनेश्वर
  • भाषा उड़िया 
  • जनसँख्या यहाँ की population लगभग 43.73   मिलियन  है।
  • राज्यपशु  सांभर हिरन
  • स्थापना दिवस -26 जनवरी 1950 
  • प्रथम राज्यपाल जॉन ऑस्टेन हुबक
  • राज्यपक्षी  नीलकंठ 
  • राज्यफूल अशोक
  • राज्यवृक्ष अश्वथ्य  
  • राज्यादिवस 26 जनवरी 1950
  • क्षेत्रफल -1,55,820  वर्ग किलो मीटर
  • कुल जिले  30 
  • सब से बड़ा शहरभुवनेश्वर 

Odisha History In Hindi ओड़िशा का इतिहास हिंदी में

 मौर्या वंश का साम्राज्य ओडिशा का इतिहास  उतना ही पुराना है जितना इसका नाम कलिंग,मौर्या काल से ही यहाँ का इतिहास सुनहरे अक्षरों से लिखा हुआ है। जब कलिंग के राजा को हरा  मौर्या वंश  का साम्राज्य स्थापित हुआ उस समय ओडिशा ने अपने प्रगति  उत्कर्ष को छुआ यहाँ से ही सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार करना शुरू किया जिस यहाँ कई शिलालेख देखने को मिलते है।


सम्राट अशोक की मित्यु के बाद यहाँ ज्यादा दिन तक मौर्या वंश का साम्राज्य नहीं रह पाया। 


185 ईसा पूर्व यहाँ चेदि वंश ने अधिपत्य स्थापित किया। 


498 में मठार वंश ने कलिंग पर अपना अधिकार कर लिया। 


500 में यहाँ नल वंश की स्थापना हुई। इस समय लोग गवान्  विष्णु को मानते थे इसलिए यहाँ पर पोडागोंडामें विष्णुविहार का निर्माण करवाया। भोमवंश  रानी मोहिनी  ने भुवनेश्वर में मोहिनी मंदिर का निर्माण करवाया। 


कलिंग राज्य ने 6वी-7 वी सदी में स्थापत्य कला की ऊंचाइयों को छुआ क्युकी इसी काल में स्वरनोजलेश्वर,रामेश्वर ,लक्ष्मणेश्वर,भरतेश्वर,शत्रुधनेश्वर,परशुरामेश्वर मंदिरो का निर्माण हुआ जिस ने ओड़िशा को एक प्रसिद्द तीर्थ भी दिया। 


महाशिव गुप्त ने यहाँ पर भगवन जगरनाथ का मंदिर बनवा कर खुद को इतिहास में अमर कर लिया इन्होने 38 मंदिरो का निर्माण करवाया। 


गंग वंश ने 3 शाब्दियों तक कलिंग पर अपना अधिपत्य बनाये रखा और सूर्य मंदिर जैसे अन्य कई मंदिरो का निर्माण भी कराया। 


Odisha History की पूरी जानकारी hindi में  ओड़िशा का इतिहास

मुग़ल साम्राज्य १३६१ में यहाँ मुग़ल साम्राज्य की आधारशिला फ़िरोज़ शाह तुगलक ने रखी। पर  किसी मंदिर या अन्य किसी इमारत का निर्माण नहीं हुआ। 


ब्रिटिश साम्राज्य 18वी शताब्दी  में यहाँ ईस्ट इंडिया कंपनी के साथअंग्रेजो ने हुकूमत की जो काफी सालो तक चली।


 20 वी शताब्दी  आज़ाद हो गए और ओड़िशा 26 जनवरी 1950 को एक अलग राज्य बन गया।


ओड़िशा के कुछ खास तथ्य  Odisha History jankari

अर्थववस्था ओडिशा के लोगो  की जीविका का मुख्य स्त्रोत कृषि है। यहां पर 80 % लोग कृषि का कार्य ही करते है पर यहाँ की जनसँख्या ज्यादा और खेत काम  कारण प्रति व्यक्ति आय बहुत काम है। यहाँ की किसान जो भी उपज करते है वो एक अच्छा जीवन बिताने के लिए काफी नहीं होती। इसलिए लोग कुछ गैरकृषि कार्य भी करते है। यहाँ पर सूर्य का प्रकाश भी मद्धम होता है और भूमि भी इतनी उपजाऊ नहीं है इसलिए ओडिशा  चावल की खेती महत्वपूर्ण रूप से की जाती है। 

शिक्षा ओडिशा में Literacy Rate 73.5 % है। यहाँ  महाविद्यालय और कुछ अन्य विद्यालय भी है। यहाँ की शिक्षा संस्थानों में वृद्धि स्वतंत्रता के बाद  हुई।

यातायात यहाँ आवागमन के कई साधन है जिसमे रेलवे,सड़के,उड्डयन और बंदरगाह भी शामिल है। 

यहाँ भुवनेश्वर में एयरपोर्ट है तथा पाराद्वीप बंदरगाह प्रमुख माना जाता है। 

पर्यटन स्थल यहाँ अनेक मंदिर है जो अपनी धार्मिक मान्यताओं  प्रसिद्द है आइये देखते है यहाँ कौनकौन से जगह है जो लोगो को आकर्षित करती है। 

  • कोणार्क  स्थित सूर्य मंदिर यहाँ का सब से बड़ा आकर्षण का केंद्र  है। 
  • पूरी का जगरन्नाथ मंदिर 
  • ओडिशा की राजधानी में स्थित लिंगराज मंदिर 
  • सुन्दर पूरी तट तथा अन्य स्थल।      

संस्कृति ओडिशा में जो कला प्रसिद्द है उसे लकड़ी या पत्थरो के ऊपर नक्काशियों के द्वारा बनाया जाता है। यहाँ का नित्य बहुत प्रसिद्द है जिसे एक अलग नाम ओडिशी से जाना जाता है। यहाँ  यंत्रो में बासुरी और मांदल  प्रिय है। यहाँ की नित्य कला और हस्त शिल्प कला का उत्तम संगम कोणार्क के मंदिर में बने कलाकृत्यों में मिलता है जिसमे अनेक नित्य   मुद्राये,भवबंगिमा दिखायी देती है। यहाँ एक अनोखा त्योहार जिसमे नावो की पूजा होती हैबोईता मनाया जाता है।

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