नमसकर दोस्तो, आज History Hindi मे हम लोग बात करने जा रहे हैं छित्तोरगढ़ (Chittorgarh) की रानी Padmavati की। Rani Padmavati History से जुड़ी मूवी Padmavat को ले कर वैसे ही बहोत बड़ा बवाल चल रहा है, ऐसे मे यह जानना ज़रूरी हो जाता है की आखिर रानी पद्मावती की असली कहानी थी तो क्या थी।

ये है Padmavati की असली History, जिसे हर भारतीय को जानना चाहिए। History के पन्नों से कुछ अनसुनी दास्तां.. इतिहास में घटी बहुत सी कहानियां तो आपने सुनी ही होंगी ,परंतु चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) की रानी ‘पद्मावती’ की कहानी सुनते ही आज भी दिल सहर उठता है। Indian History में दफ़न वह तारीख जब दिल्ली सल्तनत में खिलजी (Khilji) वंश के शासक ने चित्तौड़गढ़ पर कब्ज़ा कर लिया था, यह बात आज भी सभी के ज़हन में है।

रानी पद्मावती इतिहास । Rani Padmavati History

ये तो सभी जानते हैं रानी पद्मावती (Padmavati) चित्तौड़ (Chittor) की रानी थी, और उनका नाम ही रानी पद्मिनी था। रानी पद्मिनि के साहस और बलिदान की गौरवगाथा इतिहास में अमर है। आइये खोलते इतिहास के इन पन्नो को. Alauddin Khilji ख़िलजी वंश के संस्थापक Jalaluddin Khilji  का भतीजा और दामाद था।Alauddin Khilji ने राज्य को पाने की चाह में अपने चाचा Jalaluddin की हत्या 22 October, 1296 को कर दी और दिल्ली में स्थित बलबन के लाल महल में अपना राज्याभिषेक सम्पन्न करवाया।रानी पद्मावती से जुड़ा सच्चा इतिहास । Rani Padmavati History in hindi

Sinhal Dweep के राजा Gandharv Sen और रानी Champavati की बेटी पद्मिनी चित्तौड़ के राजा Ratan Singh के साथ ब्याही गई थी। कहा जाता है कि रानी पद्मिनी बहुत ही खूबसूरत थी और उनकी खूबसूरती पर एक दिन दिल्ली के सुल्तान ‘Alauddin Khilji’ की बुरी नजर पड़ गई। दरअसल चित्तौड़गढ़ के किले में उसने दर्पण में रानी के प्रतिबिंब को देखा था ,रानी के खूबसूरत सौन्दर्य को देख कर Alauddin Khilji रानी तरफ आकर्षित हो गया।

रानी पद्मावती से जुड़े सत्या । Rani Padmavati History Truth 

चित्तौड़गढ़ को लूटने वाला Alauddin Khilji राजसी सुंदरी Rani Padmavati को पाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार था इसलिए उसने चित्तौड़ पर हमला कर दिया। रानी पद्मिनी ने आग में कूदकर जान दे दी, लेकिन अपनी आन-बान पर आँच नहीं आने दी।

खिलजी ने एक योजना बनाकर महाराणा Ratan Singh के पास संधि करने का प्रस्ताव भिजवाया और कहा कि मैं मित्रता का इच्छुक हूं और मैंने Rani Padmavati कि बड़ी तारीफ़ सुनी है मैं सिर्फ उनके दर्शन करना चाहता हूं। कुछ गिने चुने सिपाहियों के साथ एक मित्र के नाते चित्तौड़गढ़ में प्रवेश करना चाहता हूं। इससे मेरी बात भी रह जाएगी और आपकी भी, लेकिन इसके पीछे Khilji की एक गहरी चाल थी।

आखिर कैसे Ratan Singh Khilji के षड़यंत्र मे फस गए? Rani Padmavati History story

परंतु Ratan Singh को Khilji के रचे हुए षड़यंत्र का जरा सा भी अंदाजा नही था। और वह Khilji की मीठी बातो में आ गया। अपने कुछ गिने चुने सैनिको के साथ खिलजी ने चित्तौड़गढ़ में प्रवेश किया। महाराणा Ratan Singh ने मित्र के नाते खिलजी का स्वागत किया और जाते वक़्त खिलजी को किले के द्वार तक पहुचाने आ गए इसी बीच मौके का फायदा उठाकर खिलजी ने महाराणा रतनसिंह को बंधक बना लिया।

Rajput सैनिको ने रतन सिंह को छुड़ाने के लिए बहुत से प्रयत्न किये, लेकिन वह असफल ही रहे और Alauddin Khilji ने बार-बार यही कहलवाया के जब तक Rani Padmavati हमारे पड़ाव में नही आएँगी तब तक Ratan Singh को मुक्त नही करेंगे। Rani Padmavati ने भी अपनी सूझ भुज और चतुराई का इस्तेमाल करते हुए एक षड़यंत्र Alauddin Khilji के खिलाफ रचा और कहलवाया कि वे एक शर्त पर ही उसके पड़ाव में आएंगी ,जब पहले राणा जी से मिलने दिया जाए।

Rani Padmavati History 

इस प्रस्ताव को खिलजी ने स्वीकार कर लिया योजना अनुसार Rani Padmavati की पालकी में उनकी जगह उनका ख़ास ‘Kaka Gora’ बैठा और दासियो की जगह पालकियों में Rajput Sainik बैठे, पालकियों को उठाने वालो के भेस में भी Rajput Sainik ही थे। इस तरह हजारों राजपूतों ने डोलियों में हथियार वगैरह भरकर Alauddin के डेरों की तरफ प्रस्थान किया, गोरा-बादल भी इनके साथ हो लिए।

Khilji के आदेशानुसार सभी पालकियों को Rana Ratan Singh के पास जाने की इजाजत दे दी गयी, पालकिया राणा के तम्बू तक पहुची और मौका पाकर Rana Ratan Singh को किले की तरफ रवाना कर दिया गया और सभी योद्धा भूखे शेरो की तरह Alauddin Khilji की सेना पर टूट पड़े।

अचानक हुए इस हमले के कारण Khilji की सेना में भगदड़ मच गयी लेकिन गोरा-बादल भी कईं राजपूतों के साथ वीरगति को प्राप्त हुए। इस बात से Khilji बेहद गुस्सा हो गया और बदला लेने के लिए आ धमका।

Alauddin Khilji ने काफी समय तक चित्तौड़गढ़ के किले का घेराव किये रखा जिसके चलते चित्तौड़गढ़ के किले में खाने पीने की सामग्री की भी भारी मात्रा में कमी हो गयी इसके चलते राजपूतो को काफी कठिनायों का सामना करना पड़ा और राजपूतो ने Khilji से समझौता करने की ठान ली ,परंतु यह बात रानी को बिलकुल भी पसंद नही आयी।

Rani Padmavati Real Story (Rani Padmavati History)

18 August, 1303 ई. को Rani Padmavati के नेतृत्व में चित्तौड़ के History का पहला जौहर हुआ। अपने सतीत्व की रक्षा के लिए 1600 क्षत्राणियों ने जौहर किया। अपनी लाज बचाने के लिए उन्होंने आग में कूदकर अपनी जान दे दी। और Rana Ratan Singh ने भी केसरिया साफ बांध शाका व्रत का पालन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। जौहर पुराने समय में भारत में राजपूत स्त्रियों द्वारा की जाने वाली क्रिया थी।

जब युद्ध में हार निश्चित हो जाती थी तो पुरुष मृत्युपर्यन्त युद्ध हेतु तैयार होकर वीरगति प्राप्त करने निकल जाते थे तथा स्त्रियाँ जौहर कर लेती थीं अर्थात जौहर कुंड में आग लगाकर खुद भी उसमें कूद जाती थी । जौहर कर लेने का कारण युद्ध में हार होने पर शत्रु राजा द्वारा हरण किये जाने का भय होता था।

दोस्तों हमने ये आर्टिकल बहुत से जगह और लोगो और दुसरे ब्लोग्स से पूरी तरह पता करने के बाद यह आर्टिकल लिखा है अगर आपको इस आर्टिकल में कुछ कमी लगती है या कुछ गलत है तो आप कमेंट में हमें बताइए हमें उसे जल्द से जल्द सुधरेंगे.

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उम्मीद करते होंगे की इस लेख की मदद से आपको Rani PadmavatiHistory के बारे मे काफी कुछ जानने को मिला होगा। History Hindi की पूरी कोशिश रहती है की, हम आपलोगो को सही से सही जानकारी दें। PadmavatiHistory सब लोगो को नहीं पता है और इसीलिए Rani Padmavati History से जुड़ी अफवाएन फैलती रहती हैं।

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