आज हम भारत के History इतिहास के सबसे बड़े रहस्य नेताजी Subash Chandra Bosh जी के जीवन से जुड़े कुछ तथ्यों से पर्दा उठाने का प्रयास करेंगे।सुभाष जी का Janam 23 January 1827 उड़ीसा में हुआ था।वे एक General family में पैदा हुए थे। इनसे बड़े इनके आठ भाई बहन थे Tenth class इन्होंने अच्छे Numbaro से पास की थी और Second स्थान प्राप्त किया था।Subash Chandra Bosh से जुड़े कुछ अनसुने तथ्य Hidden Facts About Neta Ji

इनके क्रांतिकारी विचारों का पता तब चला था जब उन्होंने अपने प्रोफेसर से झगड़ा कर लिया था क्योंकि उन्होंने कोई गैर भारतीय कमेंट किया था, जिसके कारण सुभाष जी को अंग्रेजी हुकुमत के चलते 1 साल घर से बाहर रहना पड़ा था नेताजी ने 1920 में Indian Civil Services की test pass की थी और चौथा स्थान प्राप्त किया था उस समय किसी Indian students के लिए यह Exam pass करना बड़ी चुनौती थी।


Hidden Facts About Neta Ji Subash Chandra Bosh


स्वतंत्रता संग्राम में सुभाष जी की भूमिका “Role of Subash Chandra Bosh ji in the freedom struggle” उस समय असहयोग आंदोलन चल रहा था ,जब सुभाष जी  20 July 1921 को गांधी जी से मिले। गांधी जी ने सलाह दी कि वह Kolkata जाकर चितरंजन जी के साथ काम करें। वे Bangal में असहयोग आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे और सुभाष चंद्रा बोस स्वराज पार्टी की स्थापना की और Swaraj Party ने Calcutta Municipality का चुनाव जीता और सुभाष जी को महापालिका का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया।

How Neta Ji Subash Chandra Bosh Changed working of whole Corporation?

नेता जी ने कैसे महापालिका के कम करने के तरीके को बदल के रख दिया?

Neta Ji Subash Chandra Bosh ने “Kolkata Municipal Corporation” के पूरे राज्य और काम करने के तरीके को बदल डाला। वहां के रास्तों के नाम बदले गए जो कि अंग्रेजी शासकों के नाम पर थे और उन रास्तों को हमारे देश और संस्कृति से जुड़े हुए नाम दिए गए स्वतंत्रता संग्राम में प्राण निछावर करने वालों के परिजनों को महापालिका में नौकरी मिलेगी।

इन कामों की वजह से Subash Chandra Bosh एक बड़े नेता जी के तौर पर उभर कर सामने आ रहे थे। उनकी छवि दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी। 1928 में Simon Commission का पूरे देश में विरोध हो रहा था जिसका Kolkata इसी समय  नेता जी ने पूर्ण स्वराज की बात कही ।महात्मा गांधी पूर्ण स्वराज की नीति से  सहमत नहीं  थे।


Unknown Facts About Neta Ji Subash Chandra Bosh in hindi


26 January 1931 को kolkata में Subash Chandra Bosh जी राष्ट्रीय ध्वज हाथ में लिए एक विशाल रैली का नेतृत्व कर रहे थे तभी पुलिस ने उन पर लाठी चार्ज करके उन्हें जेल में बंद कर दिया। गांधी जी ने British Government के साथ समझौता किया और सभी कैदियों को छुड़वा लिया।

ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों को फिर भी नहीं छोड़ा। गांधी जी ने भगत सिंह जी की फांसी माफ कराने के लिए बात कही पर  उन्होंने शक्ति से बात नहीं की। इसका सुभाष जी ने काफी विरोध किया और उन्हें ना बचा पाने के कारण सुभाष जी कांग्रेस और गांधी जी के तरीकों से नाराज हो गए। 1933 से 1936 तक सुभाष जी यूरोप में रहे, अपना कुछ इलाज करवाने के नाम पर पर वहां पर उन्होंने निरंतर भारत की आजादी के लिए काम जारी रखा।

नेताजी सुभाष चंद्रा बोस  से जुड़े तथ्य । Strategy of Neta Ji Subash Chandra Bosh

Subash Chandra Bosh जी ने इटली के नेता Benito Mussolini से समर्थन मांगा जिन्होंने india की स्वतंत्रता में सहयोग देने का आश्वासन दिया और आयरलैंड के नेता दी वेलेरा से भी उनकी अच्छी दोस्ती होने लगी । जो कि एक साथ संदेश था कि नेता जी यूरोप सिर्फ अपना इलाज नहीं बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ कुछ योजना भी बना रहे थे।

1938 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए Subash Chandra जी को गांधी जी ने चुना और 1939 में गांधीजी ने इन्हें पद से हटाने के लिए कहा क्योंकि गांधीजी को सुभाष जी की नीतियां पसंद नहीं आ रही थी।

नेता जी ने चुनाव जीत कर कैसे सबको हैरान कर दिया । Neta Ji Subash Chandra’s Election Strategy

गांधी जी ने अध्यक्ष पद के लिए सीता रमैया को चुना और चुनाव करवाया गया सबको मालूम था कि गांधीजी ने सीता रमैया का नाम दिया है तो वही जीतेंगे और Subash Chandra Bosh जी हार जाएंगे। जब चुनाव का नतीजा आया तो सब हैरान हो गए क्योंकि सुभाष जी को 1580 मत मिले और सीता मैया को 1377 मत मिले।

सुभाष जी के चुनाव जीतने के बाद गांधी जी ने इस हार को अपनी हार बताया और कहा कि मैं सुभाष जी के तरीको से सहमत नहीं हूं जो सहमत हैं वह कांग्रेस में रहे बाकी कांग्रेस छोड़ दे ।

जवाहर लाल नेहरू हमेशा नेता जी के साथ थे । Jawahar Lal Nehru Supported Neta Ji Subash Chandra Bosh

कार्यकारिणी सदस्यों में से इस्तीफा दे दिया परंतु जवाहरलाल नेहरु जी नेता जी  के साथ खड़े रहे और बापू को मनाना भी चाहा पर वह नहीं माने Subash Chandra Bosh जी जो किसी पद या राजनीति के भूखे नहीं थे उन्होंने 29 अप्रैल 1939 को कांग्रेस अध्यक्ष पद  से इस्तीफा दे दिया। वह चाहते थे कि सब मिलकर देश की आजादी के लिए काम करें.

और यह मिशन किसी के अहंकार के कारण मर ना जाए परंतु किसी का अहंकार अभी भी शांत नहीं हुआ सुभाष जी ने जैसे ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया उसके कुछ दिनों बाद ही उन्हें कांग्रेस पार्टी से बाहर कर दिया गया ।

गांधी जी को दूसरी बार एहसास हो चुका था कि उनकी लोकप्रियता कम हो रही है।पहला जब  भगत सिंह की क्रांति आई थीऔर यह दूसरी क्रांति थी ,जब सब Subash Chandra Bosh जी के पीछे चलना चाहते थे और उन्हीं को नेताजी के रूप में देखता भी चाहते थे।

नेता जी विश्व युद्ध नीति । Subash Chandra Bosh’s World War Strategy

दूसरे विश्व युद्ध के समय दूसरे world War के काले बादल पूरे विश्व पर छा रहे थे। और सुभाष जी की दूरदर्शिता भी यही कहती थी कि जिस प्रकार से German Hitler के नेतृत्व में इतने क्रूर  होते जा रहे हैं, और हिटलर की जो महत्वकांक्षाएं हैं वह विश्व युद्ध करवा कर ही दम लेंगी और यही सबसे अच्छा मौका था.

अंग्रेजों को india से भगाने का क्योंकि विश्व युद्ध के कारण अंग्रेज आर्थिक और मानसिक तौर पर तभी सबसे ज्यादा कमजोर होंगे। 3 September 1939 को ब्रिटेन और जर्मनी में युद्ध छिड़ गया उसी दिन Subash Chandra Bosh जी ने घोषणा की कि यही सही अवसर है भारत को आजादी दिलाने का। 8 सितंबर 1939 को सुभाष जी ने कहा यदि कांग्रेस काम नहीं कर सकती तो उनका दल  यह काम करेगा और अपने दम पर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

उनके इस फाइसे से  अंग्रेजी सरकार डर गई  और सभी मुख्य नेताओ को कैद  केआर दिया ।जिसके विरोध में सुभाष जी और नेताओं ने अनशन शुरू कर दिया ।अंग्रेजी सरकार पहले भी मुह की  खा चुकी थी। जेबी भगत सिंह ने अनशन  किया था और अंग्रेजी सरकार 2 विशाव युद्ध के  के साथ-साथ भारत में कोई विद्रोह नहीं चाहती थी.

शुभाष चंद्रा बोस के बारे में कुछ जरुरी बाते जो आपको जाना चाहिए Hidden Facts

और इसके  दबाव में British Government को सुभाष जी को छोड़ना पड़ा पर उन्हें उनके घर में नजरबंद कर दिया गया और पुलिस का कड़ा पहरा उनके घर के चारों तरफ लगा दिया गया और 16 January 1941 को एक पठान का भेष बनाकर वह अपने घर से भाग निकले और Afghanistan जा पहुंचे।वह उन्होने इटली  दूतावास में मदद मांगी।इटली दूतावास ने  यह जानकर कि है अंग्रेजों के दुश्मन है। उनको एक जाली पासपोर्ट बनाकर रुस भेज दिया।

जहां से होते हुए वह बर्लिन ,जर्मनी जा पहुंचे और हिटलर से मदद मांगी। May 29, 1942 को हिटलर और सुभाष जी की मुलाकात हुई ।ऐसा इंसान जो अपने अहंकार में चूर था वह किसी की क्या मदद करता इसको नेता जी ने जान  लिया और जापान की ओर निकल लिए। जापान में तत्कालीन प्रधानमंत्री जी ने नेता जी  को आश्वासन दिया कि वह उनकी मदद करेंगे।

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उम्मीद करते है की नेता जी से जुड़े ये कुछ तथ्य आपको पसंद आए होंगे। अगर आपको इसी तरह की जानकारी और चाहिए तो हमें कमेंट में बताइए

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