Uttarakhand History In Hindi उत्तराखंड का इतिहास हिंदी में- उत्तरप्रदेश के पर्वतीय स्थलों को मिलकर सन 2000 में एक नए राज्य को गठित किया गया जिसका नाम 2000 से लेकर 2006 तक उत्तराँचल था पर बाद में इसका नाम उत्तराखंड रख दिया गया।

उत्तराखंड दो शब्दों  उतर +खंड से बना हुआ है जिसका अर्थ है उत्तर का एक हिस्सा। ये प्रदेश पहले उत्तर प्रदेश में ही था इसका कोई अलग अस्तित्व नहीं था। उत्तराखंड का इतिहास History of Uttarakhand अपने अंदर देव काल की बहुत सी बातें छुपाये हुए है।उत्तराखंड का इतिहास हिंदी में Uttarakhand History In Hindi

ये प्रदेश धर्म और आस्था का केंद्र है जहाँ पर गंगोत्री तथा यमुनोत्री है इसका मतलब यही से गंगा और यमुना नदियाँ बहती है।यहाँ कई तीर्थस्थल भी है  उत्तराखंड की राजधानी देहरादून है और यही शहर उत्तरखंड का सब से बड़ा शहर भी है।  उत्तराखंड की सीमाओं भारत के पडोसी दो देश नेपाल और तिब्बत इसकी उत्तरी सीमा पर है तथा दो राज्य जिसमे दक्षिण से उत्तर प्रदेश और पश्चिम से हिमाचल प्रदेश की सीमाओं से घिरा हुआ उत्तराखंड है। 

छोटा सा परिचय उत्तराखंड का A Quick  View Of  Uttarakhand History

  • प्रथम मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी
  • वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत 
  • राजधानी  –देहरादून
  • भाषा हिंदी,संस्कृत  
  • जनसँख्या यहाँ की population लगभग 10 .08 मिलियन  है।
  • राज्यपशु  कस्तूरी मृग
  • स्थापना दिवस -9 नवंबर 2000
  • प्रथम राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला
  • राज्यपक्षी  मोनाल
  • राज्यफूल ब्रह्म कमल
  • राज्यवृक्ष बुरांश
  • राज्यादिवस 9 नवंबर 2000
  • क्षेत्रफल -53,483 वर्ग किलो मीटर
  • कुल जिले  13
  • सब से बड़ा शहरदेहरादून 

History of Uttarakhand In Hindi उत्तराखंड का इतिहास हिंदी में

वैदिक काल से स्वतंत्रता के पहले तक का Uttarakhand इतिहास – Uttarakhand history till independence from Vedic period

उत्तराखंड कोदेव भूमि” ,”तपोभूमि ” माना गया है इसकी सुंदरता इतनी अधिक है की पूर्व काल में यहाँ यक्ष,किन्नर ,गन्थर्व रहते थे जिनके  राजा धन के देवताकुबेरको कहा गया है। कुबेर की राजधानी बद्रीनाथ के ऊपर एक स्थान जिसका नाम अलकापुरी था यहाँ बताई जाती है।  स्कन्द पुराण में हिमालय के बारे में ये लिखा गया है की वो पांच खंडो का है जिसमे नेपाल,हिमाचल प्रदेश ,कश्मीर,कुमाऊ और केदारखंड शमिल है। वेदो और प्राचीन ग्रंथो में इस प्रदेश का केदारखंड और मानस खंड के नाम से उल्लेखन किया गया है।

ये भी उल्लेखन  की केदारखंड के अलगअलग खंड थे हर खंड के एक राजा थे। परमार राजा ने यहाँ अपना राज्य स्थापित कर के  इन गढ़ो के कारण इस क्षेत्र को एक नया नाम दियागढ़वालकुछ समय बाद यहाँ.

उत्तराखंड का इतिहास हिंदी में Uttarakhand History

1803 में नेपाल की गोरखा सेना ने यहाँ हमला कर दिया और 25 वर्ष तक यहाँ अपना प्रभुत्व बनाये रखा। इनके इस अधिकार को ले कर गढ़वाल राजा क्रोध में थे पर उनके पास इतनी सेना नहीं थी की वो खुद  हमला कर सके इसलिए उन्होंने  अंग्रेज़ो से मदत मांगी और उसके बदले कुछ धन देने को कहा। अंग्रेज़ो ने गोरखाओ को यहाँ से खदेड़ दिया पर जब राजा ने अंग्रेज़ो से वादा की हुई धन राशि देने में असमर्थता दिखयी तो अंग्रेज़ो ने उन्हें सिर्फ टिहरी दे कर पूरा राज्य ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दिया। 

1856 से लेकर 1884 तक का समय   ब्रिटिश काल का सब से अच्छा समय माना गया इस समय उत्तराखंड की  देख रेख हैनरी रैमजे के हाथो में थी। 

आज़ादी पाने के लिए यहाँ के लोगो ने भी स्वतंत्रता संग्राम में विशेष भूमिका निभाई जिसके अंतर्गत 1916 में कुमाऊ परिषद् की स्थापना की गयी जिस में गोविंदवल्लभ पंत,मोहन सिंह,चंद्र लाल शाह आदि लोगो ने विशेष सहयोग दिया। 

स्वतंत्रता के बाद का इतिहास  Uttarakhand History

जब भारत गणतंत्र हो रहा था उस समय टिहरी को 1949 में एक जिला बना कर उत्तर प्रदेश की सीमा में मिला दिया गया। उसके बाद तीन सीमान्त जिलों (उत्तरकाशी,चमोली,पिथौड़ागढ़) को उत्तर प्रदेश में मिलाकर एक अलग राज्य बनाया गया जो की सं 2000 में एक नए नाम  उत्तांचल और एक नए अस्तित्व से जाना गया। 

2006 में Indian Cabinet ने यहाँ के लोगो के बारबार अनुरोध करने पर उत्तरांचल का नाम बदले के लिए सोचा और 2007 से इसे एक नया नामउत्तराखंडदे दिया। 

उत्तराखंड से कुछ जुड़े कुछ तथ्य  Uttrakhand ki History Hindi me 

शिक्षा यहाँ  साक्षरता दर  जिसमे 80 % पुरुष और 70 % महिलाये शिक्षित है पर यह Literacy Ratio दोनों में बराबर होता तो यह राज्य औऱ प्रगति कर सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड भी अपना एक स्थान रखता है। जैसे  देहरादून दून कॉलेज नैनीताल का संत जोसेफ कॉलेज,जी डी बिरला मेमोरियल स्कूल,रुखड़ी कॉलेज,The Asian School  इसके अलावा भी यहाँ बहुत सारे कॉलेज और बोर्डिंग स्कूल है।  यहाँ हर कोई पढ़ाई करता है चाहे कम ही पढ़ पाए इसलिए भारत के कई राज्यों के मुकाबले यहाँ एवरेज लिटरसी रेश्यो  ज्यादा है। 

अर्थव्यवस्था उत्तर प्रदेश से अलग हो कर ये राज्य बना जो उत्तर प्रदेश का 9 % उत्पादन करता है। उत्तराखंड चूना पत्थर,रक् फास्फोरस,ताम्बा,ग्रेनाइट आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते है। उत्तराखंड की 90 % जनता कृषि पर निर्भर है। इसके साथ साथ यहाँ पर पानीबिजली का उत्त्पादन भी होता है। 

यातायात  यहाँ यातायात के लिए बहुत से साधन है जिसमे कुछ एयरपोर्ट्स है जो की यहाँ के मुख्या शहरों में है। History of Uttarakhand In Hindi

बस सेवाएं यहाँ अच्छी है और किसी भी जगह से आप बस के द्वारा जा सकते है। रेलवे स्टेशन्स यहाँ रामनगर,कोटद्वार,हरिद्वार,उद्यमसिंघनगर,रुड़की आदि शहरों में है।

Uttarakhand History – Uttarakhand Imporant Information and Guide hindi

संस्कृति यहाँ अन्य स्थानों से संस्कृति थोड़ी भिन्न है। यहाँ के लोग बहुत मेहनती होते है इसका उदाहरण हम सीढ़ीदार खेतो से देख  सकते है। यहाँ लोग दिन में रोटी और रात में  चावल खाते है। क्युकी ये एक  इसलिए यहाँ लोगो के घर पहाड़ी पत्थर के बने होते है। उत्तराखंड में हर महीने कोई कोई त्यौहार मनाया जाता है। शादी में यहाँ के लोग अनेक तरह के आभूषण पहनते है जिसमे फूलो के गहने प्रमुख है ,विवाहित औरतो  पहचान यहाँ चेरयु पहने से  है।  विवाह में दुल्हन घागरा पहनती है। 

खाना यहाँ का खाना बहुत सरल होता है जैसे टमाटर का झोल,आर,चेसु,बथुए का पराठा आदि। 

कलाये यहाँ के लोग त्यौहार पर बहुत सुन्दर अल्पना बनाते है। यहाँ की औरते चावल को पीस कर उनसे चित्र बनती है जो देखने में बहुत सुन्दर लगते है ये लोक कलाए आप को हर घर में देखने को मिल जाएँगी। 

History of Uttarakhand In Hindi

पर्यटन स्थल उत्तराखंड इतना सुन्दर प्रदेश है की यहाँ पर हर स्थल ही देखने लायक है पर फिर भी कुछ ऐसे धार्मिक और सुन्दर  स्थान है जिन्हे देखने लोग दूरदूर से आते है। प्रमुख स्थान नैनीताल और मसूरी है। History of Uttarakhand In Hindi

  • धार्मिक स्थलों में केदारनाथ,बद्रीनाथ,गंगोत्री,यमुनोत्री,ऋषिकेश।हरिद्वार आदि है। 
  • रानीखेत,फूलो की घाटी,भीम ताल.अल्मोड़ा,चकराता,औली आदि अन्य दार्शनिक स्थल है। 
  • मानसर नाम की जगह जहाँ पर सीता माता पृथ्वी में समायी थी यही पर है। 
  • माता अनुसुइया ने यही पर ब्रम्हा,विष्णु,नाहेष को बालक बना अपना वात्सल्य यही पर  दिया था। 
  • उत्तराखंड एक विशेष धार्मिक इतिहास का साक्षी रहा है और आज भी यहाँ धर्मकर्म किये जाते है जाते है।

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