West Bengal history : पश्चिम बंगाल WestBengal भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक बड़ा राज्य है। जिस तरह यह प्रदेश भौगोलिक रूप में तो अलग है ही साथ ही साथ संस्कृति,साहित्य और कलाओं के क्षेत्र में भी सबसे अलग और विशिष्ट है। इसके पड़ोस में नेपाल, Sikkim, Bhutan, असम, बांग्लादेश, Orissa, झारखंड और बिहार हैं। इसकी राजधानी कोलकाता है।  यहां की मुख्य भाषा बांग्ला है और हिंदी और अंग्रेज़ी भी राज्य की प्रमुख भाषाएँ है।

West Bengal भारत का एक बड़ा भाग है, आइये जानते है, जिसका भारत के विकास में ओर अस्तित्व निर्माण में विशेष योगदान है। पश्चिम बंगाल के इतिहास के बारे में, [ West Bengal history }

पश्चिम बंगाल का इतिहास-History of West Bengal

बंगाल का पूर्व ऐतिहासिक काल में एक विशिष्ट स्थान है। सिकंदर के आक्रमण के समय गंगारिदाई नाम के ताकतवर साम्राज्य का बंगाल पर शासन था। गुप्त और मौर्य के प्रभुत्व का बंगाल पर कुछ ज्यादा असर नहीं पड़ा। बाद में शशांक Bengal के राजा बने और कहा जाता है कि सातवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में उन्होंने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसके बाद गोपाला ने पाला साम्राज्य बनाया जिसने यहां सदियों तक राज किया और विशाल राजवंश बनाया। पाला के बाद सेना साम्राज्य आया जिसका अंत दिल्ली के मुस्लिम शासकों ने किया। ” West Bengal history “पश्चिम बंगाल का इतिहास की पूरी जानकारी - West Bengal history in Hindi

बंगाल प्रांत का क्षेत्र फल 489,500 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या 8 करोड़ से ज्यादा थी। पूर्वी बंगाल भौगोलिक रूप से एवं कम संचार साधनों के कारण पश्चिमी बंगाल से लगभग अलग-थलग था। 1836 में, ऊपरी प्रांतों को एक लेफ्टिनेंट गवर्नर के शासन के अंतर्गत कर दिया गया और 1854 में गवर्नर जनरल-इन-काउंसिल को बंगाल के प्रत्यक्ष प्रशासन से मुक्त कर दिया गया। अलग Chief-commisionership बनाने के लिए 1874 में आसाम को सिलहट सहित, बंगाल से अलग कर दिया गया और बाद में 1898 में lushai hills को भी इसमें शामिल कर दिया गया। बंगाल जैसे बड़े और इतनी अधिक आबादी वाले प्रांत का प्रबंधन बहुत कठिन था।

बंगालका विभाजन Partition Of Bengal- West Bengal history in hindi

बंगाल के विभाजन के दौरान Lord Curzon भारत के गवर्नर जनरल थे। 20 जुलाई सन 1905 को लार्ड कर्ज़न ने बंगाल के विभाजन का निर्देश जारी किया जिसके मुताबिक आदेश था की बंगाल को दो भागों में विभाजित किया जाए- पूर्व बंगाल और शेष भाग बंगाल का जिसमे बंगाली, बिहारी और ओडिसी  लोग शामिल थे। पूर्व बंगाल की जनसंख्या लग-भग 3.1 करोड़ थी और दूसरे भाग की जनसंख्या लग-भग 5.4 करोड़।

‘ West Bengal history ‘ बंगाल के विभाजन क्षेत्र को तुलनात्मक तौर पर कम करना था क्योंकि इतने बड़े प्रदेश का शासन संभव नही था इसलिए विभाजन का प्रशासनिक कारण सुचारु रूप से प्रणाली का पालन करना बताया गया लेकिन इस विभाजन का असल कारण तो कुछ और ही था और वो बंगाल का विभाजन धर्म और क्षेत्र के नाम पर करना था। जिसके चलते बंगाल में उत्पन्न हो रहे राष्ट्रवाद के सैलाब को काबू में किया जा सके।

लेकिन 7 अगस्त सन 1905 विभाजन विरोधी आवाज़ों के सम्मिलित होने का आन्दोलन प्रारम्भ हुआ, और 16 अक्टूबर 1905 विभाजन का दिन को राष्ट्रीय शोक के रूप में सामने आया। अनेक अनशन किये गए लोगों ने अमर सोनल बंगला के गीत गाते मिले। साथ ही साथ वन्दे मातरम भी सड़कों पर गुज़रते हुए गाया गया। जो की भारत का राष्ट्रीय गीत बना। बंगाली नेतृत्व कर्ताओं ने “स्वदेशी और बहिष्कार” आंदोलनों की शुरुआत की।

West Bengal ki history hindi me

स्वदेशी आंदोलन के अनुसार स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करना प्रारंभ किया और ब्रिटिश सरकार के किसी भी समान का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया गया। अनेक मुस्लिम महिलाओं और बच्चों ने भी इस आंदोलन में भागीदारी की। जिसके प्रति Britishers की प्रतिक्रिया अत्यधिक क्रूर रही। आंदोलन का कारवाँ जल्द ही बॉम्बे मद्रास और उत्तर भारत तक पहुँच गया। लेकिन जल्द ही आंदोलन ने उग्रवादी रूप धारण कर लिया क्योंकि विनम्रता से कुछ ख़ास परिणाम सामने नहीं आ रहे थे मुख्य नेतृत्व कर्ताओं में Bal Gangadhar Tilak,  Bipin Chandra Pal और अरबिंदो घोष प्रमुख थे। साथ ही साथ दो अलग तरह के दलों का गठन हुआ जो- नरम दल और गर्म दल के नामों से जाने गए।

बंगाल के राष्ट्रीय आन्दोलन के कुचलने के लिए सरकार ने अपना चक्र प्रारम्भ किया. लोगों को जेल में डाल दिया गया और साम्प्रदायिक विभेद फैलाकर दंगों जा सहारा तक लिया गया दमन के कारण खुले रूप से विद्रोह करना असंभव था. इसलिए बंगाल के नवयुवकों ने गुप्त संगठनों का निर्माण कर अस्त्र-शास्त्रों को एकत्रित कर हिंसात्मक ढंग से सरकार का विरोध आरम्भ कर दिया. बंगाल विभाजन से स्वदेशी आन्दोलन को बल मिल गया. विदेशी वस्त्रों को जलाना, विदेशी वस्तुओं की दुकानों पर धरना देना राजनीतिक कार्यक्रम का अंग बन गया। ( West Bengal history )

बंगाल प्रांत को ऐसे ढंग से बाँटा गया था कि पश्चिम बंगाल की जनसंख्या लगभग 5 करोड़ 40 लाख और पूर्वीय बंगाल की जनसंख्या लगभग 3 करोड़ 10 लाख हो. बंगाल के स्वदेश और स्वभाषा का अभियान रखने वाले भावुक निवासियों को यह बँटवारा ऐसा प्रतीत हुआ मानो किसी हत्यारे ने उनकी जन्मभूमि को किसी अस्त्र से प्रहार कर दो टुकड़ों में बाँट दिया गया हो, जिसकी प्रति ध्वनि भारत के कोने-कोने से सुनाई पड़ने लगी.

बंगालविभाजन के परिणाम Results of partition- history of West Bengal 

बंगाल विभाजन  के परिणाम बहुत ही महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुए. अब राष्ट्र-वादियों का जोश चरम-सीमा तक पहुँच गया और भारत में राष्ट्रीयता की भावना प्रबल हुई. वास्तव में अब तक कोई ऐसी घटना नहीं घटी थी, जिसने भारतीय राजनीति को इस तरह प्रभावित किया हो. बंगाल विभाजन  को आन्दोलन से घबरा कर सरकार ने रद्द तो कर दिया लेकिन विरोध का जो ज्वार एक बार उठा वह फिर रुका नहीं. Curzon ने बंगाल विभाजन के द्वारा भारतीय राष्ट्रीयता को नष्ट करने  का प्रयास किया था पर वह और ज़्यादा बढ़ती ही चली गई.

कर्ज़न की इच्छा थी कि ब्रिटिश साम्राज्य सुरक्षित हो और उसे अमर अधिकार प्रदान हो पर बंगाल विभाजन और अपनी प्रतिक्रियावादी नीतियों के द्वारा उसने ब्रिटिश साम्राज्य का अंत स्वयं ही उत्पन्न कर दिया। यह बंग-भंग योजना अगली पीढ़ी के लिए वरदान के समान साबित हुई। भारतवासियों में एक नए उत्साह का संचार हुआ बंगाल का विभाजन  Curzon की एक बड़ी भूल साबित हुई, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को लाभ पहुँचाने की जगह सिर्फ और सिर्फ नुकसान की ओर अग्रसर किया और फिर नष्ट कर दिया।

West Bengal history साहित्य आंदोलन-एक अनूठा आंदोलन-

बांग्ला भाषा में एक ही साहित्य आंदोलन हुआ हैं और वो है भुखी पीढी आंदोलन जो साठ के दशक में शक्ति चट्टोपाध्याय, मलय रायचौधुरी, देबी राय, सुबिमल बसाक, समीर रायचौधुरी  के द्वारा पटना शहर से शुरु किया गया एवम जो पूरे बंगाल में शोर स्थापित कर दिया था; यहा तक की आंदोलन कारियों के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया गया था। बाद में सब बाइज्जत बरी हो गये थे, परन्तु उन-लोगों की ख्याति और अखण्ड सहियोग ने केवल बंगाल में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत में तथा America ,Europe में भी फैल गया था। यह खुद में एक इतिहास था।

पश्चिम बंगाल एक नज़र में-About history West Bengal-

पश्चिम बंगाल की स्थापना 1 नवम्बर 1956 को हुई।

यहॉं की राजधानी कोलकाता को बनाया गया साथ ही साथ राज्य मेँ  19 जिलों का गठन हुआ। बंगाल का पूर्व ऐतिहासिक काल मे उच्च्तर स्थान है। और प्राचीन काल मे शशांक यहाँ जे राजा बने। राज्य का जूट उत्पादन देश में सबसे अधिक है साथ ही साथ यहाँ स्टील, ऑटोमोबाइल, केमिकल और मशीनरी का भी अच्छा व्यापार है। पश्चिम बंगाल पर्यटकों के लिए भी ख़ास आकर्षण का केंद्र है।

पश्चिम बंगाल के प्रमुख व्यक्तियों में जगदीश चंद्र बसु, सत्यजीत राय,रविन्द्र नाथ टैगोर, शर्मिला टैगोर आदि प्रमुख है। पश्चिम बंगाल (भारतीय बंगाल) मे तृणमूल कांग्रेस सरकार है। पश्चिम बंगाल (भारतीय बंगाल) के मुख्य मंत्री ममता बनर्जी हैं और पिछले कई वर्षों से यहां वाम मोर्चे की सरकार है। अन्य लोकप्रिय स्थानीय नेताओं में ममता बनर्जी का नाम शामिल है। नृत्य, संगीत तथा चल चित्रों की यहां लंबी तथा सराहनीय उपस्थिति रही है।दुर्गा पूजा यहां अति उत्साह तथा व्यापक रूप से  के साथ मनाई जाती है। विश्व भर से लोग दुर्गा पूजा के साक्षी बनने यहाँ आते है।

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यहां के लोग मछली-भात (माछ-भात)) बहुत पसंद करते हैं। यह प्रदेश अपनी मिठाईयों के लिये भी प्रसिद्ध है – रसगुल्ले का आविष्कार भी यहीं हुआ था। साथ ही साथ अनेक बंगाली मिठाइयाँ भी पूरी दुनिया मे प्रचलित है। पश्चिम बंगाल भारत का एक सम्पूर्ण और सबल अंग है, जो की भारत की असीम भव्यता और सार्थकता को सजीव बनाता है। 

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